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मध्य एशिया में भारत का बड़ा दांव! पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा क्यों है बेहद अहम, इन मुद्दों पर होगी बड़ी बात
 

 


भारत मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 29 अगस्त से उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इसके बाद उनका किर्गिस्तान जाने का भी कार्यक्रम है. पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य एशिया की रणनीतिक अहमियत लगातार बढ़ रही है.

उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत ने प्रधानमंत्री के दौरे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है.

11 साल बाद उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी.

यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी और करीब 11 साल के अंतराल के बाद उनकी द्विपक्षीय यात्रा हो रही है. बातचीत में दोनों देश मौजूदा रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने के साथ भविष्य के सहयोग का एजेंडा भी तय करेंगे.

व्यापार से लेकर रक्षा तक, कई मुद्दों पर होगी चर्चा

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की बैठक में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग के कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

इनमें व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज, दुर्लभ मृदा तत्व, विकास सहयोग और सांस्कृतिक संबंध भी बातचीत के एजेंडे में रहेंगे.

दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और दूसरे बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा कर सकते हैं.

कनेक्टिविटी और अड़चनों पर भी रहेगा फोकस

भारत के लिए मध्य एशिया तक बेहतर कनेक्टिविटी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा है. भौगोलिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के कारण भारत के सामने इस क्षेत्र से सीधे संपर्क की कई चुनौतियां रही हैं.

ऐसे में पीएम मोदी के दौरे के दौरान कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों के साथ व्यापार में आने वाली अड़चनों को दूर करने पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

2015 के बाद कितना बदला भारत-उज्बेकिस्तान रिश्ता?

स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की पिछली उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी विस्तार हुआ है.

उन्होंने बताया कि इस अवधि में दोनों देशों के बीच व्यापार में करीब 300 प्रतिशत और निवेश में लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इससे संकेत मिलता है कि भारत और उज्बेकिस्तान के आर्थिक रिश्ते पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं.

अब दोनों देश इस आर्थिक साझेदारी को रणनीतिक सहयोग के दूसरे क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा पर क्यों बढ़ा जोर?

दुनिया में तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों के विस्तार के साथ महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्वों की मांग तेजी से बढ़ी है.

भारत भी अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए ऐसे संसाधनों वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है. ऐसे में उज्बेकिस्तान के साथ महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों पर सहयोग भविष्य के लिहाज से अहम हो सकता है.

रक्षा और सुरक्षा में भी बढ़ेगा सहयोग

मध्य एशिया की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण है. दोनों देशों के बीच पहले से ही सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग मौजूद है.

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान इस सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है उज्बेकिस्तान?

उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है और क्षेत्रीय स्तर पर इसका रणनीतिक महत्व काफी अधिक है. भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत संबंध केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं हैं.

मध्य एशिया में भारत की आर्थिक और रणनीतिक पहुंच बढ़ाने, ऊर्जा एवं खनिज संसाधनों तक सहयोग विकसित करने और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से भी यह साझेदारी महत्वपूर्ण है.

पीएम मोदी का आगामी दौरा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अगर दोनों देश व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों और पहलों को आगे बढ़ाते हैं, तो इससे भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को आने वाले वर्षों में नई दिशा मिल सकती है.