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मोदी कैबिनेट में बनी रहेगी जगह: हरदीप सिंह पुरी फिर जाएंगे राज्यसभा, मंत्री पद जाने की तमाम अटकलों पर लगा ब्रेक

 

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है। उनके मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल की समाप्ति 25 नवंबर को हो रही है। इससे पहले बुधवार, 28 अक्टूबर को पार्टी ने उन्हें एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट से उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया। पुरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।

चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव की घोषणा की थी। यहां 12 नवंबर को मतदान होना है। हरदीप सिंह पुरी वर्ष 2021 से केंद्र की मोदी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह केंद्रीय शहरी विकास मंत्री भी रह चुके हैं।

यूपी में उम्मीदवारों की सूची से नाम गायब होने पर उठे थे सवाल

पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हरदीप सिंह पुरी जनवरी 2014 में बीजेपी में शामिल हुए थे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें अमृतसर से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

हाल ही में जब बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की, तो सूची में पुरी का नाम शामिल नहीं था। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। मोदी कैबिनेट के संभावित विस्तार की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं।

अब मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इन अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है। हालांकि, राज्यसभा चुनाव में जीत और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होगा।

वैश्विक तेल संकट के बीच अहम फैसला

हरदीप सिंह पुरी को ऐसे समय में राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले लगातार चर्चा में हैं।

मंगलवार को पुरी ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर कहा था कि भारतीय रिफाइनरियां उन आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल खरीदेंगी, जो सबसे बेहतर कीमत देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

पुरी ने कहा, “मैंने कभी कोई दबाव महसूस नहीं किया है।”

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देश मॉस्को की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकार के लिए ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और किफायती कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।