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Election Commission: वोटर लिस्ट से लेकर ECINet तक 7 बड़े बदलाव, जानें Form 6 और Form 7 के नए नियम

 

भारतीय निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं में कई बदलाव किए हैं। इनका उद्देश्य मतदाता सूची के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना, शिकायतों के निपटारे को आसान बनाना और योग्य मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। नए प्रावधानों में आयोग की बैठकों, ECINet सिस्टम की जांच, नए मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने से जुड़ी शिकायतों के नियम शामिल हैं।

1. चुनाव आयोग की बैठकों और प्रशासनिक फैसलों में बदलाव

नई व्यवस्था के तहत आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से साझा करने और बैठक में लिए गए फैसलों का लिखित रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को आयोग के निर्देशों का समय पर पालन करना होगा। विदेश यात्रा के लिए अनुमति से जुड़े नियम भी लागू किए जाने की बात कही गई है।

इसके अलावा, मतदाता सूची से संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित करने की जानकारी सामने आई है। इसमें IIT और IIIT के विशेषज्ञों को शामिल किए जाने का उल्लेख है।

2. नए वोटरों के Form 6 में बदलाव

नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए भरे जाने वाले Form 6 में बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म में पहले पूछा जाने वाला यह सवाल हटा दिया गया है कि आवेदक का नाम पिछली मतदाता सूची में शामिल था या नहीं।

इस बदलाव का उद्देश्य नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाना बताया गया है। हालांकि, आवेदन के लिए जरूरी अन्य विवरण और दस्तावेज संबंधी नियम लागू रहेंगे।

3. Form 7 से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सख्ती

मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने के लिए Form 7 का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रक्रिया में एक व्यक्ति द्वारा जमा किए जा सकने वाले आवेदनों की संख्या सीमित करने का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत एक व्यक्ति अधिकतम 10 आवेदन दे सकेगा, जबकि सामान्य दिनों में एक महीने में पांच आवेदन की सीमा बताई गई है।

नाम हटाने से पहले संबंधित अधिकारी को शिकायत करने वाले व्यक्ति और उस मतदाता का पक्ष सुनना होगा, जिसका नाम हटाने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य बिना उचित जांच के किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हटाए जाने की आशंका को कम करना है।

4. SIR के दौरान सुनवाई और दस्तावेज जमा करना आसान

मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR के दौरान दस्तावेजों में कमी या गलती पाए जाने पर मतदाताओं को राहत देने के लिए कुछ सुविधाओं का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जरूरत पड़ने पर मतदाता के घर जाकर दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। कुछ मामलों में सुनवाई ऑनलाइन कराने की सुविधा भी दी जा सकती है। जो मतदाता खुद उपस्थित नहीं हो सकता, उसके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को शामिल होने की अनुमति दिए जाने की बात भी कही गई है। इन सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा।

5. मतदाता सूची में छूटे लोगों को जोड़ने के लिए अभियान

यदि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से रह जाता है, तो BLO पुरानी और नई सूची का मिलान कर ऐसे लोगों की पहचान कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित मतदाताओं से संपर्क कर Form 6 भरवाने और उनका नाम सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिक केवल प्रक्रिया की जानकारी न होने या आवेदन न कर पाने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।

6. 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची अपडेट

रिपोर्ट में 15 अक्टूबर से 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) अभियान की शुरुआत का उल्लेख है।

इसके तहत 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले से दर्ज विवरण में गलती होने पर सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन से पहले संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर लागू कार्यक्रम और निर्देश देखना जरूरी है।

7. डिजिटल वोटर लिस्ट और समयसीमा में बदलाव

मतदाता सूची को खोजना आसान बनाने के लिए राजनीतिक दलों को सर्च की सुविधा वाली PDF उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इससे सूची में मतदाताओं के नाम और विवरण ढूंढने में सुविधा मिल सकती है।

रिपोर्ट में दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए निम्नलिखित समयसीमाएं भी बताई गई हैं:

  • दिल्ली: दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और उनके निपटारे की तारीख 30 नवंबर बताई गई है।
  • महाराष्ट्र: दावे और आपत्तियां 26 अक्टूबर तक, उनका निपटारा 10 नवंबर तक और अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी होने की जानकारी दी गई है।

इन तारीखों को संबंधित निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक अधिसूचना से सत्यापित करना जरूरी है, क्योंकि राज्यवार कार्यक्रम और समयसीमा अलग हो सकती है।

मतदाता सूची में बदलाव का आम लोगों पर क्या असर होगा?

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य नए मतदाताओं के पंजीकरण को आसान बनाना, नाम हटाने से पहले उचित सुनवाई सुनिश्चित करना और मतदाता सूची में छूटे पात्र लोगों को जोड़ना है। डिजिटल रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार से राजनीतिक दलों तथा मतदाताओं को सूची की जांच करने में भी सुविधा मिल सकती है।