Defence Export: यूरोप और इजराइल तक पहुंचा भारत का गोला-बारूद, हथियारों की सप्लाई में तेजी से बढ़ी हिस्सेदारी
भारत वैश्विक रक्षा निर्यात के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय देशों को भारतीय गोला-बारूद की आपूर्ति में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने यूरोपीय देशों को करीब 8,271 करोड़ रुपये मूल्य का गोला-बारूद सप्लाई किया। इसमें आर्टिलरी और मोर्टार शेल जैसे हथियार शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी और मध्य यूरोप में भारत का रक्षा निर्यात 1,600% बढ़ा है। इस क्षेत्र में भारत अब दक्षिण कोरिया के बाद गोला-बारूद का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। बताया गया है कि चार साल पहले भारत इस सूची में 28वें स्थान पर था।
इजराइल को रक्षा उपकरणों के पुर्जों की सप्लाई भी बढ़ी
यूरोप के अलावा भारत का रक्षा निर्यात पश्चिम एशिया में भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत इजराइल को विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जे सप्लाई करने वाले प्रमुख विदेशी देशों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया। वर्ष 2023 में भारत इस सूची में नौवें स्थान पर था।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक पिछले दो वर्षों में भारत ने इजराइल को लगभग 630 करोड़ रुपये मूल्य के आर्टिलरी शेल, मोर्टार राउंड और विस्फोटक भेजे। यह मात्रा और मूल्य इससे पहले के छह वर्षों में हुए कुल निर्यात के बराबर बताया गया है।
यूरोप भारत से हथियार क्यों खरीद रहा है?
हथियारों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नजर रखने वाली स्वीडन की संस्था सिपरी के वरिष्ठ शोधकर्ता सिमोन वेजमैन के मुताबिक, यूक्रेन की सैन्य जरूरतों और यूरोपीय देशों की रक्षा मांगों के कारण भारत से गोला-बारूद की खरीद बढ़ी है।
भारत के पास विकसित होता रक्षा विनिर्माण क्षेत्र है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को पूरा करने में भूमिका निभा रहा है। किंग्स कॉलेज लंदन के राजनीति विज्ञानी वॉल्टर लाडविग के अनुसार, भारतीय कंपनियां सीधे यूक्रेन को हथियार भेजने के बजाय यूरोपीय देशों को आपूर्ति कर रही हैं।
इस तरह यूरोपीय देशों के माध्यम से भारतीय रक्षा उत्पाद यूक्रेन की जरूरतों से जुड़े आपूर्ति नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ी हथियारों की मांग
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य संघर्ष जारी है। युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।
युद्ध के कारण यूक्रेन को गोला-बारूद और अन्य सैन्य संसाधनों की लगातार जरूरत रही है। वहीं, यूरोपीय देशों ने भी अपनी रक्षा तैयारियों और हथियारों के भंडार को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोला-बारूद की मांग बढ़ी है।
भारत के रक्षा उद्योग के लिए क्या मायने हैं?
यूरोप और पश्चिम एशिया में भारतीय रक्षा उत्पादों की आपूर्ति बढ़ना देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को दर्शाता है। इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, रक्षा निर्यात के आंकड़ों का आकलन करते समय हथियारों की श्रेणी, आपूर्ति की अवधि और संबंधित देशों के व्यापार रिकॉर्ड को ध्यान में रखना जरूरी है।
भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात गतिविधियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण कई देशों की सैन्य जरूरतें बढ़ी हुई हैं।