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Congress का नया सियासी गणित: बिना CM चेहरे की रणनीति कितनी कारगर? पंजाब का नया फॉर्मूला डिकोड!

 

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपनी रणनीति को लेकर बड़ा फैसला किया है। पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए बिना सामूहिक नेतृत्व के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी बनाए गए सचिन पायलट ने भी साफ किया है कि चुनाव से पहले किसी एक नेता को CM फेस के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया जाएगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर में पार्टी हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया। रिपोर्टों के मुताबिक, पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को साथ लेकर चलने की है।

चन्नी और राजा वड़िंग के बीच खींचतान बनी चुनौती

पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से जुड़े गुटों के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व को यह चिंता भी है कि अगर चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया, तो दूसरे नेताओं और उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ सकता है।

इसी वजह से कांग्रेस ने फिलहाल CM फेस घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई है।

सचिन पायलट ने संभाली कमान

पंजाब में संगठनात्मक स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस ने सचिन पायलट को राज्य का प्रभारी बनाया है। पायलट ने पद संभालने के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है।

इसके बाद एक विरोध प्रदर्शन में पंजाब कांग्रेस के कई प्रमुख नेता एक साथ नजर आए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की रणनीति को सामने रखा।

पायलट के मुताबिक, चुनाव अभियान में राहुल गांधी प्रमुख भूमिका निभाएंगे और मुख्यमंत्री पद का फैसला चुनाव के बाद पार्टी के विधायक दल और हाईकमान की प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

क्या यह रणनीति पहले भी अपनाई गई है?

कांग्रेस पहले भी कई विधानसभा चुनावों में बिना पहले से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए चुनाव मैदान में उतर चुकी है। हालांकि अलग-अलग राज्यों और चुनावों में इसके परिणाम अलग रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर 2018 में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसी एक नेता को पहले से CM उम्मीदवार घोषित किए बिना चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री का चयन किया गया।

वहीं दूसरी तरफ ऐसे चुनाव भी रहे हैं जहां बिना CM फेस के चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसलिए सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने या न करने को चुनावी परिणाम का अकेला कारण मानना सही नहीं होगा।

2022 में पंजाब में क्या हुआ था?

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे किया था। इससे पहले राज्य में नेतृत्व को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मतभेद भी चर्चा में रहे थे।

चन्नी को CM फेस बनाने के बावजूद कांग्रेस चुनाव में सरकार नहीं बना सकी। इस बार पार्टी ने उससे अलग रास्ता अपनाते हुए किसी एक नेता को CM उम्मीदवार घोषित नहीं करने का फैसला किया है।

कांग्रेस के सामने इस बार क्या चुनौती है?

2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने दो बड़े संगठनात्मक मुद्दे हैं—एक तरफ पार्टी को राज्य में अपना चुनावी अभियान मजबूत करना है और दूसरी तरफ अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय बनाए रखना है।

पार्टी की मौजूदा रणनीति में किसी एक नेता के बजाय सामूहिक नेतृत्व, राहुल गांधी की चुनावी भूमिका और चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद पर फैसला करने की बात सामने आई है।

अब देखना होगा कि चुनावी अभियान आगे बढ़ने के साथ पंजाब कांग्रेस इस सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था को किस तरह लागू करती है और क्या अलग-अलग गुटों के नेता एक मंच पर लगातार साथ दिखाई देते हैं।