वोटर लिस्ट में धांधली पर भड़की Congress , 45 लाख मतदाताओं का नाम हटाने का आरोप लगा सीएम का बेंगलुरु में धरना
कर्नाटक में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में Form 7 आवेदन दाखिल किए गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए पूरे मामले की व्यापक और आपराधिक जांच की मांग की है।शिवकुमार का दावा है कि कुछ जगहों पर बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए Form 7 जमा किए गए, जिनमें मतदाताओं के नाम, पते और EPIC नंबर जैसी जानकारियां मौजूद थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की जानकारी उन लोगों तक कैसे पहुंची जिन्होंने ये आवेदन जमा किए।
45 लाख मतदाताओं को लेकर क्या मामला है?
वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिन्हित की गई हैं। अगस्त में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO श्रेणी में चिन्हित किए गए थे, जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य श्रेणियां शामिल हैं। बेंगलुरु में करीब 46.88 लाख मतदाता इस श्रेणी में थे।
इसके अलावा करीब 43.8 लाख मतदाताओं को ‘logical discrepancies’ से जुड़े नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई थी। इन मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड और पात्रता से संबंधित दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है।
Form 7 को लेकर कांग्रेस के आरोप
डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि कुछ इलाकों में Form 7 का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के अनुरोध के लिए किया गया। उन्होंने संबंधित चुनाव अधिकारियों से विधानसभा क्षेत्रवार Form 7 आवेदनों की जानकारी मांगी है और संदिग्ध मामलों में FIR दर्ज करने की मांग की है।उन्होंने यह भी कहा है कि अगर किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने की कोशिश हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
बेंगलुरु में पहले भी हो चुका है विरोध
वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया को लेकर कर्नाटक कांग्रेस पहले भी बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।
वहीं, पूरे मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि ASDDO या discrepancy श्रेणी में किसी मतदाता का नाम चिन्हित होना अपने आप में अंतिम रूप से वोटर लिस्ट से नाम हटना नहीं है। संबंधित मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया मौजूद है।कर्नाटक में SIR को लेकर अब Form 7 आवेदनों और मतदाता रिकॉर्ड की जांच पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।