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सस्ते सोने-चांदी का मिलेगा तोहफा! क्या सरकार घटाएगी इंपोर्ट ड्यूटी? जानिए ज्वेलर्स की क्या है मांग

 

सोने और चांदी पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार की उम्मीदों के मुताबिक असरदार साबित होती नजर नहीं आ रही है। आयात को कम करने के बजाय ज्यादा शुल्क की वजह से सोने की तस्करी और ग्रे मार्केट के कारोबार में बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार अब इस नीति की समीक्षा करने पर विचार कर सकती है।

जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने को लेकर सरकार के स्तर पर बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी तक शुल्क में कटौती को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि सरकार इस मामले में सही समय का इंतजार कर रही है।

बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी से नहीं घटा सोने का आयात

राजेश रोकड़े के अनुसार, सरकार को उम्मीद थी कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से देश में इसके आयात में कमी आएगी। लेकिन अब तक ऐसा प्रभाव देखने को नहीं मिला है। दूसरी ओर, ज्यादा शुल्क के कारण ग्रे मार्केट और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने की चिंता बढ़ गई है।

ज्वेलरी इंडस्ट्री पहले ही सरकार को आगाह कर चुकी थी कि अगर आयात शुल्क बहुत ज्यादा बढ़ाया गया, तो इससे अवैध तरीके से सोना लाने की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौजूदा परिस्थितियों को इसी चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार कर सकती है इंपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा

इंडस्ट्री की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार अब सोने और चांदी पर लगाए गए मौजूदा आयात शुल्क की समीक्षा कर सकती है। माना जा रहा है कि अगर शुल्क में कटौती की जाती है तो इससे आधिकारिक आयात को बढ़ावा मिल सकता है और ग्रे मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार शुल्क में कितनी कटौती करेगी और इसका ऐलान कब किया जाएगा। फिलहाल इस मुद्दे पर बातचीत जारी रहने की बात कही जा रही है।

मई में 6% से बढ़ाकर 15% हुआ था शुल्क

केंद्र सरकार ने मई में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। उस समय इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य महंगे आयात पर नियंत्रण रखना और देश से विदेशी मुद्रा के ज्यादा बाहर जाने को रोकना था।

मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सरकार विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी खाते पर दबाव कम करना चाहती थी। हालांकि, बाद के आंकड़ों से संकेत मिला कि शुल्क बढ़ाने से सोने के आयात पर उम्मीद के मुताबिक असर नहीं पड़ा।

भारत हर साल करता है 700 से 900 टन सोने का आयात

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश में हर साल लगभग 700 से 900 टन सोने का आयात किया जाता है। सोने की घरेलू मांग काफी ज्यादा होने के कारण आयात भारतीय अर्थव्यवस्था और चालू खाते के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मूल्य के लिहाज से 24 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 71.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, मात्रा के आधार पर आयात घटकर करीब 721 टन रह गया।

इसका मतलब है कि कम मात्रा में सोना आयात होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण भारत का कुल इंपोर्ट बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

शुल्क घटने से क्या होगा फायदा?

अगर सरकार सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करती है, तो आधिकारिक चैनल के जरिए आयात बढ़ने की संभावना हो सकती है। इससे अवैध आयात और ग्रे मार्केट पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, शुल्क घटाने का असर सोने-चांदी की घरेलू कीमतों, आयात की मात्रा, ज्वेलरी इंडस्ट्री और सरकार के राजस्व पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार के सामने राजस्व और अवैध कारोबार पर नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।

फिलहाल सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार की समीक्षा और इंडस्ट्री के साथ बातचीत के बाद इस पर तस्वीर साफ हो सकती है।