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BREAKING: TMC के चुनाव चिन्ह मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, चुनाव आयोग को दिया 4 महीने का समय

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच संगठन और आधिकारिक पहचान को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तय समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर बनी यह स्थिति अनिश्चित समय तक जारी नहीं रह सकती।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नाम और उसके पारंपरिक 'फूल और घास' चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया था। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए।

चुनाव आयोग की इस अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था विवाद के अंतिम निपटारे तक लागू रहने के लिए की गई है।

इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा कि वह दोनों गुटों के दावों पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामले की सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े पुराने विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों में लंबे समय तक देरी होने से स्थिति और जटिल हो सकती है। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि दोनों पक्षों को अपना पक्ष और दस्तावेज रखने का पर्याप्त मौका मिले, लेकिन प्रक्रिया भी एक उचित समयसीमा के भीतर पूरी हो।

अब चुनाव आयोग को दोनों गुटों के दावों, संगठनात्मक समर्थन, दस्तावेजों और अन्य संबंधित पहलुओं पर सुनवाई करके अंतिम निर्णय लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक आयोग को करीब चार महीने के भीतर इस विवाद का निपटारा करना है।

हालांकि, अगर चुनाव आयोग को तय चार महीने की अवधि में मामले को पूरा करने में कोई वास्तविक कठिनाई आती है, तो वह इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर अतिरिक्त निर्देश या समय मांग सकता है। यानी फिलहाल अंतिम फैसला चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इस पूरे विवाद का असर आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक पहचान पर भी पड़ सकता है, क्योंकि पार्टी के पारंपरिक नाम और चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल फिलहाल विवाद के अंतिम निपटारे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली सुनवाई और उसके अंतिम फैसले पर रहेंगी।