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कांग्रेस के आरोपों पर BJP का जोरदार हमला: 'सिटिंग CEC को पद्म विभूषण और राज्यपाल बनाने वाले हमें न सिखाएं नैतिकता'

 

चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। 13 अक्टूबर 2026 को बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोयल ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की पूरी स्वायत्तता दी है।गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में चुनाव आयोग के पदों पर रहे अधिकारियों को बाद में राजनीतिक जिम्मेदारियां देकर संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश कांग्रेस का रवैया देख रहा है और विपक्ष अपने पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर रहा है।

राहुल गांधी के आरोपों पर क्या बोले पीयूष गोयल?

पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में आयोग से जुड़े अधिकारियों की नियुक्तियों और राजनीतिक भूमिकाओं के इतिहास पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने चुनाव आयोग को देशहित और जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया है। गोयल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने के बजाय ईमानदारी से काम करने की स्वतंत्रता दी गई है।

टीएन शेषन और एमएस गिल का भी किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और एमएस गिल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि कांग्रेस टीएन शेषन की ईमानदारी की तारीफ करती थी, लेकिन बाद में उन्हें 1999 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया। गोयल ने सवाल किया कि क्या इसे किसी अधिकारी को राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए?एमएस गिल का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि वह 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। उनके अनुसार, गिल को वर्ष 2000 में पद्म विभूषण मिला और बाद में उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर राज्यसभा सदस्य तथा केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।गोयल ने इन घटनाओं को कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और अधिकारियों की राजनीतिक नियुक्तियों से जुड़े सवालों के संदर्भ में पेश किया। हालांकि, ये आरोप और उनकी राजनीतिक व्याख्या पीयूष गोयल के बयान पर आधारित हैं।

अन्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी उठाए सवाल

पीयूष गोयल ने टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर का नाम लेते हुए भी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभाने वाले कुछ अधिकारियों को बाद में राजनीतिक या प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया।गोयल ने कहा कि ऐसी नियुक्तियां चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकती हैं। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि चुनावी प्रक्रिया में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को बाद में महत्वपूर्ण पद दिए जाने को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।इन मामलों पर गोयल ने अपने आरोप पेश किए, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि पहले नियुक्तियों में सरकार की भूमिका प्रमुख होती थी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2023 में कानून बनाकर चयन प्रक्रिया में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया।गोयल के मुताबिक, अब चयन समिति में प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष की भी भूमिका है। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

चुनाव आयोग को लेकर सियासी टकराव तेज

पीयूष गोयल के इस बयान से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जहां कांग्रेस और विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के पुराने कार्यकाल और अधिकारियों की नियुक्तियों का हवाला देकर पलटवार किया है।