गोकुल डेयरी चुनाव में Congress की जीत के बाद महाराष्ट्र में सियासी घमासान, सरकार के नए नियम से बदल सकता है पूरा खेल
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कोल्हापुर की गोकुल डेयरी का चुनाव चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। करीब 4,000 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाली इस सहकारी डेयरी के चुनाव में कांग्रेस समर्थित गठबंधन ने जीत दर्ज कर सत्ताधारी महायुति को बड़ा झटका दिया। हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी समितियों से जुड़े नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद डेयरी के बोर्ड में सत्ता का समीकरण बदलने की आशंका जताई जा रही है।मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस की जीत के बाद नियमों में बदलाव को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने इसे 'बहुमत की चोरी' करार देते हुए कहा कि दूध उत्पादकों के जनादेश को बदलने की कोशिश की जा रही है।
गोकुल डेयरी चुनाव में कांग्रेस गठबंधन ने कैसे हासिल की जीत?
कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को आमतौर पर गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। हाल ही में हुए इसके चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी अघाड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया।कुल 25 सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित गठबंधन ने 13 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि राज्य की सत्ताधारी महायुति को 12 सीटें मिलीं। इस तरह कांग्रेस समर्थित गुट ने एक सीट के अंतर से बहुमत हासिल कर लिया। इस नतीजे को पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति में सतेज पाटिल की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा गया।
राहुल गांधी ने भाजपा पर लगाया जनादेश बदलने का आरोप
गोकुल डेयरी में कांग्रेस समर्थित गठबंधन की जीत के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में हार के बाद नियम बदलकर सत्ता का समीकरण बदलने की कोशिश की जा रही है।राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया, लेकिन चुनाव के बाद भाजपा ने नियम बदल दिए। उन्होंने चार नए निदेशकों को वोटिंग का अधिकार देने के फैसले को जनादेश में मिलावट बताते हुए इसे दूध उत्पादकों के वोट की चोरी करार दिया।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भाजपा सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है और किसानों को यह याद रहेगा कि उनके वोट के साथ क्या हुआ।
सरकार के फैसले से कैसे बदल सकता है बोर्ड का गणित?
चुनाव में हार के बाद महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी समितियों से जुड़े नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत गोकुल डेयरी के बोर्ड में पांच सरकारी निदेशकों को नामित करने का रास्ता साफ हुआ है। इनमें से चार निदेशकों को मतदान का अधिकार मिलने की बात सामने आई है।यही फैसला अब पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गया है। चुनाव में 13 सीटें जीतने वाले कांग्रेस समर्थित गठबंधन के पास पहले बहुमत था, लेकिन सरकारी नामित निदेशकों को वोटिंग का अधिकार मिलने से बोर्ड में उसका संख्याबल प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव में मिले जनादेश को इस तरह कमजोर किया जा रहा है।
4,000 करोड़ रुपये का कारोबार और लाखों दूध उत्पादकों से जुड़ी है डेयरी
गोकुल डेयरी का महत्व केवल एक सहकारी संस्था तक सीमित नहीं है। करीब 4,000 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाली यह संस्था पश्चिमी महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं में शामिल है।इससे कोल्हापुर और आसपास के इलाकों के हजारों गांवों की दूध उत्पादक समितियां और लाखों किसान जुड़े हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संस्था के नेटवर्क में करीब 8,000 ग्रामीण समितियां और 4.41 लाख से अधिक दूध उत्पादक शामिल हैं।इसी वजह से गोकुल डेयरी पर नियंत्रण को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। इस संस्था का नेतृत्व जिस गुट के पास होता है, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय नेतृत्व के बीच प्रभाव बनाने का मौका मिलता है।
महायुति ने चुनाव में झोंकी थी पूरी ताकत, फिर भी मिली हार
गोकुल डेयरी का चुनाव सत्ताधारी महायुति के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के नेताओं ने गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में पूरी ताकत लगाई थी। चुनाव में तीन मंत्रियों, दस विधायकों और दो सांसदों के सक्रिय रहने की बात सामने आई थी।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी चुनावी समन्वय को लेकर हस्तक्षेप किया था। इसके बावजूद सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 13 सीटें जीतकर महायुति को पीछे छोड़ दिया। चुनाव में महायुति से जुड़े कई प्रमुख उम्मीदवारों को भी हार का सामना करना पड़ा।
अध्यक्ष के चुनाव में कोरम बना सबसे बड़ी बाधा
चुनाव के बाद अब गोकुल डेयरी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डेयरी के नियमों के अनुसार, अध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक में कम से कम 14 संचालकों की मौजूदगी जरूरी है।कांग्रेस समर्थित गठबंधन के पास 13 निदेशक हैं। ऐसे में आरोप है कि महायुति के 12 निदेशक बैठकों से दूरी बना रहे हैं, जिससे जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पा रहा और अध्यक्ष का चुनाव टल रहा है।इस बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 नवंबर को नए सिरे से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराने का निर्देश दिया है। अब सबकी नजर इस चुनाव पर टिकी है। यदि सरकार द्वारा नामित चार निदेशकों को मतदान का अधिकार मिलता है, तो बोर्ड का मौजूदा 13-12 का समीकरण बदल सकता है।
10 नवंबर को होने वाले चुनाव पर टिकी निगाहें
गोकुल डेयरी का अगला अध्यक्ष कौन बनेगा, यह अब केवल सहकारी संस्था का आंतरिक मामला नहीं रह गया है। इसके नतीजे का असर पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है। एक तरफ कांग्रेस समर्थित गठबंधन अपनी चुनावी जीत के आधार पर अध्यक्ष पद पर दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के नए फैसले ने सत्ता की लड़ाई को और पेचीदा बना दिया है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस समर्थित गठबंधन 13 सीटों की जीत के बावजूद गोकुल डेयरी की कमान संभाल पाएगा या सरकारी नामित निदेशकों के वोटिंग अधिकार से महायुति को बोर्ड में बढ़त मिल जाएगी? 10 नवंबर का चुनाव इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।