कुछ ऐसी मुलाकात हुई थी नदीम और श्रवण की, इन फिल्मों ने बनाया सुपरस्टार
90 दशक के अगर सबसे मशहूर संगीत कारों की बात की जाती थी तो नदीम सरवर का नाम सबसे पहले आता था। उस दौर में इनके म्यूजिक की खूब डिमांड थी नदीम और श्रवण का डंका बजता था। श्रवण का कोरोना से संक्रमित होने की वजह से मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। बताया जाता है कुछ दिनों तक यह अस्पताल में भर्ती भी थे ।श्रवण राठौर एक जमाने में नदीम सैफी के साथ मिलकर बेहतरीन धुन बनाया करते थे। इन दोनों की जोड़ी को दर्शक बहुत ही पसंद करते थे इन्होंने संगीत दुनिया में एक अलग ही मुकाम हासिल किया था।
शरवण और नदीम की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी। इन्होंने एक भोजपुरी फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी फिर 1980 में यह बॉलीवुड की फिल्मों में काम करने लगे लेकिन इन्हें मनचाही सफलता नहीं मिल रही थी। जिसका इंतजार यह करीब 10 साल तक किए 10 साल तक जो भी फिल्म मिल जाती थी उनमें यह काम करने के लिए राजी हो जाते थे।
लेकिन इनकी भी किस्मत की बाजी पलटी और 90 दशक में रिलीज हुई फिल्म आशिकी से यह रातों-रात सुपरस्टार बन गए। अच्छे गाने के कारण फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और इस फिल्म के एल्बम कि 20 मिलीयन यूनिट्स की बिक्री हुई थी इसी वजह से यह बॉलीवुड की ऑल टाइम बेस्ट सेलिंग एल्बम बनी।
इसके बाद यह दोनों कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखे और बेहतरीन फिल्मों का चुनाव करके दिन प्रतिदिन आगे बढ़ते गए। इन्होंने साजन दिल है कि मानता नहीं दिलवाले फूल और कांटे सड़क जैसी फिल्मों के गाने गाय है। और इन सभी गानों को दर्शकों द्वारा खूब प्यार मिला और इन दोनों की खूब वाहवाही हुई। जानकारी के लिए बता दें साजन और राजा हिंदुस्तानी जैसी इनकी बेहतरीन फिल्में अमेजॉन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है।