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लगातार चौथे सत्र में हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 544 अंक उछला, निफ्टी में 1.60 प्रतिशत की बढ़त

 

मुंबई, 3 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में बढ़त दर्ज करते हुए अच्छी बढ़त के साथ बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स में 0.70 प्रतिशत और निफ्टी 50 में 1.60 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 544.39 अंकों यानी 0.70 प्रतिशत उछलकर 78,639 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 390.70 अंकों यानी 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,774.30 पर बंद हुआ।

व्यापक स्तर पर आई तेजी ने मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट को भी ऊपर उठाया, जहां निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.21 प्रतिशत की उछाल आई, तो स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मीडिया (3.09 प्रतिशत की गिरावट) को छोड़कर, सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में बंद हुए, जिसमें निफ्टी आईटी सूचकांक ने सबसे अधिक बढ़त दर्ज की, जिसमें 3.28 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.90 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.72 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (1.54 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (1.48 प्रतिशत) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.43 प्रतिशत) इंडेक्स का स्थान रहा।

निफ्टी50 इंडेक्स में, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, इंडिगो, इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस और एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा और भारती एयरटेल सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।

इस तरह, महज चार लगातार सत्रों में, सेंसेक्स 1,850 अंक यानी 2.44 प्रतिशत चढ़ गया है, जबकि निफ्टी 50 में करीब 800 अंक यानी 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इस बीच, एक ही सत्र में निवेशकों ने करीब 4 लाख करोड़ रुपए कमा लिए, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के लगभग 486 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 490 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया।

और इस तरह, निवेशकों की संपत्ति में पिछले चार सत्रों में 11 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि बीते 28 जुलाई को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 479 लाख करोड़ रुपए था।

इस बीच, एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि ग्लोबल स्तर पर उतार-चढ़ाव भरे हालात के बावजूद भारतीय बाजार मजबूत बने हुए हैं। मौजूदा बाजार का माहौल यह दिखाता है कि अब मौके व्यापक स्तर के बजाय खास तौर पर कुछ स्टॉक्स तक सीमित होते जा रहे हैं।

जहां बाहरी अनिश्चितताओं के बीच लार्ज-कैप कंपनियां स्थिरता बनाए हुए हैं, वहीं मजबूत फंडामेंटल वाली चुनिंदा मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां भी लंबे समय में बेहतर ग्रोथ देने की अच्छी स्थिति में हैं। इसीलिए मल्टी-कैप अप्रोच खास तौर पर अहम हो जाती है, क्योंकि यह निवेशकों को बाजार के अलग-अलग सेगमेंट में निवेश करने और साथ ही रिस्क को संतुलित रखने का मौका देती है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि आगे बाजार की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर भी टिकी रहेंगी।

अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि हालिया नीतिगत नरमी के दौर और मुद्रास्फीति तथा आर्थिक वृद्धि के संतुलित दृष्टिकोण को देखते हुए रिजर्व बैंक नीतिगत रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

हालांकि, निवेशक केंद्रीय बैंक की ओर से तरलता की स्थिति, मुद्रास्फीति की दिशा और भविष्य की नीतिगत रणनीति को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर विशेष ध्यान देंगे। भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर किसी भी प्रकार का संकेत ब्याज दरों से संवेदनशील क्षेत्रों और समग्र बाजार धारणा को प्रभावित कर सकता है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, आगे बाजार की दिशा कॉर्पोरेट मुनाफे की रफ्तार, आरबीआई की पॉलिसी के नतीजों, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी के संकेतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और घरेलू आर्थिक डेटा से तय होगी।

निवेशकों को ऐसे अच्छे बिजनेस पर ध्यान देना चाहिए जिनकी कमाई लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद हो। साथ ही, उन्हें बाजार में थोड़े समय के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, एक अनुशासित और अलग-अलग तरह के निवेश वाली रणनीति अपनानी चाहिए।

--आईएएनएस

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