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झारखंड में कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण और नियमन के लिए बना कानून, विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी

 

रांची, 20 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड में कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन, नियंत्रण, फीस निर्धारण और न्यूनतम मानकों से संबंधित विधेयक को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को स्वीकृति प्रदान कर दी। राज्य की विधानसभा ने अगस्त 2025 में ‘झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025’ पारित किया था। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही इस विधेयक ने अब कानून का रूप ले लिया है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के पांच लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने यह कानून छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, कोचिंग संस्थानों में आग जैसी घटनाओं, बुनियादी सुविधाओं की कमी, अनियंत्रित तरीके से बढ़ते कोचिंग सेंटरों और अत्यधिक फीस वसूली जैसी गंभीर समस्याओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बनाया है। कानून के तहत ऐसे सभी कोचिंग सेंटर इसके दायरे में आएंगे, जहां 50 से अधिक छात्रों को स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रमों या प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए शैक्षणिक सहायता दी जाती है।

कोई भी व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, निगमित निकाय, ट्रस्ट, एलएलपी या कंपनी इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोचिंग सेंटर स्थापित कर सकेगा। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी और राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। जिला समिति को कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण या स्थापना के लिए प्राप्त आवेदनों को स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अधिकार होगा।

छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के निवारण के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर शिकायत निवारण प्रकोष्ठ भी गठित किए जाएंगे। कानून लागू होने की तिथि से छह माह के भीतर सभी कोचिंग संस्थानों को संबंधित जिला समिति के पास पंजीकरण के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन पर समिति को 60 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि किसी संचालक के एक से अधिक परिसर या शाखाएं हैं तो प्रत्येक को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा और अलग-अलग आवेदन करने होंगे।

फ्रेंचाइजी मोड में संचालित कोचिंग सेंटरों के फ्रेंचाइजर को भी नियमों के अनुरूप आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ आधारभूत संरचना, पाठ्यक्रम, शुल्क, मूल्यांकन प्रणाली, शुल्क वापसी नीति और विद्यार्थियों के स्थानांतरण नीति का विवरण देना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार पांच लाख और दूसरी बार दस लाख रुपए तक का दंड लगाया जा सकेगा। गंभीर वित्तीय अनियमितता या कुप्रबंधन की स्थिति में कोचिंग संस्थान को पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी