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जिम्बाब्वे की क्रिकेटर मैरी-ऐन मुसोंडा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया

 

नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मैरी-ऐनी मुसोंडा ने सोमवार को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। 34 वर्षीय मुसोंडा ने आखिरी बार दो साल पहले आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2024 क्वालीफायर में देश का प्रतिनिधित्व किया था।

संन्यास की घोषणा करते हुए मैरी-ऐनी मुसोंडा ने बताया कि उनके इस फैसले के पीछे सिर्फ मैदान पर उनका प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि और भी कई वजहें थीं।

जिम्बाब्वे क्रिकेट की ओर से जारी एक बयान में मुसोंडा ने कहा, "बाहर से देखने पर ऐसा लग सकता है कि मुझमें अभी भी खेलने की काफी क्षमता बाकी है, और कई मायनों में ऐसा है भी, लेकिन यह फैसला सिर्फ प्रदर्शन या काबिलियत के आधार पर नहीं लिया गया। इसमें सही समय, नजरिए और शारीरिक स्थिति, तीनों का मेल था। 34 साल की उम्र में मुझे इस बात का ज्यादा एहसास हुआ कि यह सिर्फ इस बारे में नहीं था कि मैं खेलना जारी रख सकती हूं या नहीं, बल्कि यह इस बारे में भी था कि क्या मैं अपने शरीर से बार-बार उसी ऊंचे स्तर पर प्रदर्शन करने की उम्मीद कर सकती हूं।"

मुसोंडा ने अलग-अलग तरीकों से योगदान देने की अपनी बढ़ती इच्छा के बारे में भी बात की, खासकर युवा खिलाड़ियों को सलाह देने और महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में। उन्होंने आगे कहा, "महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने, युवा खिलाड़ियों को सलाह देने और जिम्बाब्वे में क्रिकेट के विकास में योगदान देने की मेरी भूमिका अब मेरे लिए उतनी ही अहम हो गई है, जितनी कि खुद खेलना। अब यह स्पष्ट हो गया था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का यही सही समय है।"

मुसोंडा ने साल 2019 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने 58 टी20 मुकाबलों में 25.70 की औसत के साथ 1,054 रन बनाए, जिसमें 5 अर्धशतक शामिल रहे। वहीं, 16 वनडे मुकाबलों में 22.40 की औसत के साथ 336 रन जोड़े। इसमें 103 रन की नाबाद पारी भी शामिल रही।

साल 2018 में कप्तान नियुक्त की गईं मुसोंडा ने एक उभरती हुई टीम की अगुवाई करने की जिम्मेदारी को बखूबी समझा। उन्होंने कहा, "जिम्बाब्वे की महिला टीम की कप्तानी करने का मतलब सिर्फ मैच के नतीजों की जिम्मेदारी उठाना ही नहीं था। इसका मतलब था, एक उभरते हुए खेल से जुड़ी उम्मीदों को अपने कंधों पर उठाना। हम सिर्फ मैच नहीं खेल रहे थे। हम अगली पीढ़ी के लिए एक नींव रखने में मदद कर रहे थे, जहां हर प्रदर्शन सोच बदलने और नए दरवाजे खोलने में मायने रखता था। यह सिर्फ कप्तान का ओहदा नहीं था। यह वह सब कुछ था, जिसका यह प्रतिनिधित्व करता था। ऐसा लगा जैसे वे सभी खामोश लड़ाइयां अब पूरी हो गई हैं। निजी उपलब्धि से कहीं ज्यादा, इसका मतलब कुछ बहुत बड़ा था।"

अपनी विरासत पर बात करते हुए, मुसोंडा ने कहा कि उनका प्रभाव सिर्फ आंकड़ों और रिकॉर्ड तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं जो विरासत पीछे छोड़ना चाहती हूं, वह रिकॉर्ड या माइलस्टोन से कहीं आगे की चीज है। यह प्रभाव डालने के बारे में है। अगर आज से कई साल बाद, ज्यादा लड़कियां स्कूलों में क्रिकेट खेल रही हों और उनके लिए आगे बढ़ने के ज्यादा रास्ते मौजूद हों, तो मेरे लिए वही असली विरासत होगी।"

--आईएएनएस

आरएसजी