'युवा खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत कल्चर बनाना हमारा लक्ष्य', कोचिंग की जिम्मेदारी संभालने के बाद बोलीं सिरिवर्धने
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग दो दशक तक श्रीलंका महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद पूर्व कप्तान शशिकला सिरिवर्धने नई भूमिका निभा रही हैं। वह विक्टोरिया के प्लेंटी वैली क्रिकेट क्लब में युवा खिलाड़ियों के साथ काम कर रही हैं और एक पूर्णकालिक कोच के रूप में अपने सफर की शुरुआत कर चुकी हैं।
एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से कोच बनने के सफर में वह मेलबर्न के उत्तरी उपनगरों में पहुंची हैं, जहां यह पूर्व ऑलराउंडर महिला क्रिकेटरों की अगली पीढ़ी को तैयार करने पर ध्यान दे रही हैं। इससे पहले वह खेलने के साथ-साथ नेतृत्व और कोचिंग की जिम्मेदारियां भी निभाती रही हैं, लेकिन 2026-27 का सीजन उनके करियर का पहला ऐसा अभियान है, जो पूरी तरह से कोचिंग को समर्पित है।
सिरिवर्धने ने 'क्रिकेट डॉट कॉम एयू' को बताया, "मैं विक्टोरिया के प्लेंटी वैली क्रिकेट क्लब में महिला टीमों की कोच हूं। पूरी तरह से कोच के तौर पर यह मेरा पहला साल है। पिछले साल मैं कप्तान-कोच थी, इसलिए यह पहला सीजन है जब मैं खेल नहीं रही हूं।"
सिरिवर्धने की उपलब्धियां केवल एक कप्तान के रूप में उनके अनुभव तक ही सीमित नहीं हैं। वह श्रीलंका की इकलौती ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने महिला वनडे में 1,000 से ज्यादा रन बनाए हैं और कम से कम 100 विकेट लिए हैं। उन्होंने इस फॉर्मेट में अपने करियर का समापन 2,029 रन और 124 विकेट के साथ किया।
उनका अंतरराष्ट्रीय सफर 2003 में शुरू हुआ था, जब श्रीलंका में महिला क्रिकेट का संचालन श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के सीधे नियंत्रण में नहीं होता था। समय के साथ, उन्होंने इस खेल को एक अधिक व्यवस्थित और पेशेवर माहौल में बदलते हुए देखा है। उन्होंने कहा, "जब मैंने शुरुआत की थी, तब लगभग छह क्लब थे, जिनमें शायद 200 से 400 खिलाड़ी शामिल थे। तब से हमने काफी विकास देखा है। अब नए ढांचे और सिस्टम मौजूद हैं, जो क्रिकेट को आगे बढ़ा रहे हैं और यहां तक कि रिटायर हो चुके खिलाड़ियों को भी अलग-अलग तरीकों से खेल से जोड़े रखते हैं।"
उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2020 में मेलबर्न में हुए आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में खेला था। रिटायरमेंट के बाद खेल से पूरी तरह दूर होने के बजाय, सिरिवर्धने ने कोचिंग के मौकों की तलाश शुरू की। उन्होंने अपनी 'लेवल 2' कोचिंग क्वालिफिकेशन पूरी की और पहले अंडर-19 महिला विश्व कप से पहले श्रीलंका की अंडर-19 महिला टीम के साथ काम करके अनुभव हासिल किया।
उन्होंने कहा, "रिटायर होने के बाद मैंने अपनी 'लेवल 2' कोचिंग शुरू की और इस क्षेत्र में और गहराई से जुड़ना चाहती थी। पहले अंडर-19 महिला विश्व कप से पहले मुझे श्रीलंका की अंडर-19 टीम के साथ काम करने का मौका मिला, जिसमें मुझे बहुत आनंद आया। मैं अपना अनुभव और बढ़ाना चाहती थी, इसलिए अपने कोचिंग करियर को आगे बढ़ाने के लिए मैं और सीखने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया चली गई।"
ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें खेल को एक अलग नजरिए से समझने का मौका दिया। वह ब्रिस्बेन में 'विनम-मैनली' क्लब से एक खिलाड़ी और सहायक कोच के तौर पर जुड़ीं। इससे उन्हें ऑस्ट्रेलिया के क्लब क्रिकेट स्ट्रक्चर को समझने और कोचिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में मदद मिली।
सिरिवर्धने ने बताया, "जब मैं यहां आई, तो मैंने सोचा कि चूंकि यह एक नया माहौल है, इसलिए मुझे इसे बिल्कुल शुरुआत से समझना चाहिए। इसका मतलब था कि मुझे ऑस्ट्रेलिया में एक खिलाड़ी के तौर पर क्रिकेट का अनुभव लेना चाहिए। मुझे इसमें बहुत मजा आया। मुझे एहसास हुआ कि क्रिकेट अभी भी मेरे अंदर जिंदा है। श्रीलंका में अपने परिवार को छोड़कर किसी नए देश में जाना मुश्किल था, लेकिन क्रिकेट ने इसमें बहुत मदद की। यहां का खेल काफी प्रतिस्पर्धी और बहुत मजेदार था।"
ऑस्ट्रेलिया के अपने सफर के दौरान, 2024 में वह मेलबर्न के 'बॉक्स हिल क्रिकेट क्लब' से जुड़ीं। एक साल बाद, वह 'प्लेंटी वैली' में कैप्टन-कोच के तौर पर शामिल हुईं, लेकिन मौजूदा सीजन के लिए उन्होंने खेलना छोड़ दिया है। प्लेंटी वैली में उनका मुख्य ध्यान प्रतिस्पर्धी लक्ष्यों और युवा क्रिकेटरों के दीर्घकालिक विकास के बीच संतुलन बनाने पर है।
उन्होंने कहा, "हमारे क्लब में कई युवा खिलाड़ी हैं, इसलिए मेरा ध्यान उनके विकास के साथ-साथ नतीजों पर भी है। हम जीत के लिए खेलना चाहते हैं, लेकिन साथ ही अपने युवा खिलाड़ियों को तैयार करना और इन खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत कल्चर बनाना भी हमारा लक्ष्य है।"
सिरिवर्धने का कोचिंग अपनाने का फैसला महिला क्रिकेट में हो रहे एक बड़े बदलाव को भी दर्शाता है, जहां पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अब ऐसी भूमिकाएं निभा रही हैं, जिनसे वे अपने खेल करियर के बाद भी इस खेल में योगदान दे सकती हैं। ऑस्ट्रेलिया की शेली निट्स्के और इंग्लैंड की चार्लोट एडवर्ड्स अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीमों का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि इंग्लैंड की पूर्व विकेटकीपर सारा टेलर ने पुरुषों के क्रिकेट में कोचिंग देना शुरू कर दिया है।
--आईएएनएस
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