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साबूदाना का सच जानकर रह जाएंगे हैरान, आखिर कहां से आता है ये सफेद दाना?

 

हमारे किचन में इस्तेमाल होने वाला साबूदाना व्रत और खास पकवानों का अहम हिस्सा है। साबूदाना खिचड़ी, वड़ा और खीर जैसी डिशेज़ में इसका खूब उपयोग होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये छोटे-छोटे सफेद दाने आते कहां से हैं? ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह किसी अनाज की फसल से निकलता है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है।

दरअसल, साबूदाना किसी अनाज से नहीं, बल्कि एक जड़ वाली फसल से तैयार किया जाता है, जिसे कसावा (Cassava) या टैपिओका (Tapioca) कहा जाता है। यह एक प्रकार की जड़ (root crop) होती है, जो जमीन के अंदर उगती है। इसी जड़ से निकाले गए स्टार्च से साबूदाना बनाया जाता है।

साबूदाना बनाने की प्रक्रिया काफी रोचक होती है। सबसे पहले कसावा की जड़ों को खेतों से निकालकर अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद इन्हें पीसकर उनका स्टार्च निकाला जाता है। इस स्टार्च को पानी में मिलाकर छोटे-छोटे दानों का आकार दिया जाता है और फिर इन्हें सुखाया जाता है। सूखने के बाद यही दाने साबूदाना बन जाते हैं, जिन्हें हम बाजार में खरीदते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कई लोग साबूदाना को सागो पाम (Sago Palm) से जुड़ा मानते हैं। हालांकि, पारंपरिक रूप से सागो पाम से भी स्टार्च निकाला जाता है, लेकिन भारत में जो साबूदाना आमतौर पर इस्तेमाल होता है, वह मुख्य रूप से कसावा से ही बनाया जाता है।

पोषण की बात करें तो साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। यही कारण है कि व्रत-उपवास के दौरान इसे ज्यादा खाया जाता है। हालांकि इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम होती है, इसलिए इसे संतुलित आहार के साथ लेना बेहतर माना जाता है।

सोशल मीडिया पर भी अक्सर साबूदाना को लेकर कई तरह की जानकारियां वायरल होती रहती हैं। बहुत से लोग जब पहली बार इसके असली स्रोत के बारे में जानते हैं, तो हैरान रह जाते हैं कि यह किसी अनाज से नहीं, बल्कि एक साधारण जड़ से तैयार होता है।

कुल मिलाकर, साबूदाना सिर्फ एक खाने की चीज नहीं, बल्कि इसके पीछे एक पूरी प्रोसेस और खेती की कहानी छिपी है। अगली बार जब आप साबूदाना खाएं, तो आपको जरूर याद आएगा कि यह छोटे-छोटे दाने असल में कसावा की जड़ों से बनकर आपके थाल तक पहुंचते हैं।