'आप ही कर दो संस्कार, मेरे पास समय नहीं है...' भाई की मौत के बाद बहन ने छोड़ा शव, वीडियो में जाने आश्रम संचालक ने किया अंतिम संस्कार
कुरुक्षेत्र से सामने आई एक घटना ने भाई-बहन के रिश्ते को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के उत्तम नगर की रहने वाली पुष्पा रानी अपने इकलौते बड़े भाई जुगल किशोर के अंतिम संस्कार के लिए कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल पहुंचीं, लेकिन कुछ देर बाद ही भाई का शव अस्पताल में छोड़कर रिश्तेदार के साथ वहां से चली गईं। इसके बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, उनकी अस्थियों का विसर्जन भी आश्रम की ओर से सरस्वती नदी में किया गया।इस पूरी घटना से पहले बाबा निशान सिंह और पुष्पा रानी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। बाबा ने पुष्पा को भाई के अंतिम संस्कार के लिए बुलाया था। बातचीत में पुष्पा ने कहा, "आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी। मेरे पास समय नहीं है। मैं रुक नहीं सकती। अगर मैं खुद ठीक होती, तो रुक जाती।"
भाई के शव को अस्पताल में छोड़कर चली गईं
जानकारी के मुताबिक जुगल किशोर का शव कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में रखा हुआ था। बाबा निशान सिंह ने उनकी बहन पुष्पा रानी से संपर्क कर अंतिम संस्कार के लिए अस्पताल आने को कहा। बताया गया कि वह काफी मुश्किल से वहां आने के लिए तैयार हुईं।पुष्पा अस्पताल पहुंचीं, लेकिन कुछ समय बाद ही भाई के शव को वहीं छोड़कर एक रिश्तेदार के साथ चली गईं। इसके बाद जुगल किशोर के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने संभाली।
आश्रम ने किया अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन
बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी के सदस्यों ने जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन भी सरस्वती नदी में आश्रम की ओर से किया गया।बाबा निशान सिंह ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि भाई-बहन के ऐसे रिश्ते को देखकर उन्हें बेहद पीड़ा हुई। उनका कहना था कि अंतिम समय में जब किसी अपने को परिवार के साथ और सहारे की जरूरत होती है, उस समय इस तरह शव को छोड़कर चले जाना बेहद दुखद है।
घटना ने खड़े किए रिश्तों पर सवाल
जुगल किशोर के अंतिम संस्कार से जुड़ी यह घटना सामने आने के बाद भाई-बहन के रिश्ते और बदलते पारिवारिक संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि पुष्पा रानी ने अपने भाई के शव को अस्पताल में छोड़कर जाने की जो वजह बताई, उसमें उन्होंने खुद के ठीक नहीं होने और समय नहीं होने की बात कही थी।ऐसे में घटना के सभी पहलुओं को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। लेकिन यह मामला इतना जरूर दिखाता है कि अंतिम संस्कार जैसी जिम्मेदारी के समय जब परिवार साथ नहीं होता, तब कई बार समाज के दूसरे लोग ही आगे आकर मानवीय कर्तव्य निभाते हैं।