यादों में गुलशन: जूस की दुकान से शुरू किया सफर, फिर ऐसे बने म्यूजिक इंडस्ट्री के बादशाह
मुंबई, 4 मई (आईएएनएस)। 5 मई… ये सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि उस शख्सियत की बर्थ डेट है, जिसने भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री को एक नई पहचान दी। हम बात कर रहे हैं गुलशन कुमार की, जिनका नाम आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है। 1956 में दिल्ली के एक साधारण पंजाबी अरोड़ा परिवार में जन्मे गुलशन कुमार ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वो भारत के सबसे बड़े म्यूजिक ब्रांड टी-सीरीज के संस्थापक बनेंगे।
उनका शुरुआती जीवन बहुत ही साधारण था। उनके पिता दिल्ली के दरियागंज इलाके में फलों के जूस की दुकान चलाते थे। गुलशन कुमार भी अपने पिता के काम में हाथ बंटाते थे, लेकिन उनके सपने उस छोटे से दुकान से कहीं बड़े थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जूस की दुकान का काम संभाला, लेकिन मन कहीं और था। उन्हें हमेशा कुछ अलग करने की चाह थी।
धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि संगीत लोगों की जिंदगी में एक बड़ा असर डालता है। बस यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई। उन्होंने जूस की दुकान छोड़कर एक छोटा सा काम शुरू किया सस्ती कैसेट्स और गानों को रिकॉर्ड करके बेचने का। उस समय म्यूजिक इंडस्ट्री इतनी बड़ी नहीं थी और कैसेट्स आम लोगों के लिए महंगे होते थे। गुलशन कुमार ने इस मौके को समझा और सस्ते दाम पर संगीत लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया।
यहीं से शुरू हुई सुपर कैसेट्स इंडस्ट्री लिमिटेड (टी-सीरीज) की कहानी। शुरुआत आसान नहीं थी। संघर्ष बहुत था, लेकिन उनकी मेहनत और सोच साफ थी संगीत हर घर तक पहुंचना चाहिए। धीरे-धीरे उनकी कंपनी ने रफ्तार पकड़ी और लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगी।
गुलशन कुमार का असली टर्निंग पॉइंट आया 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' से। इस फिल्म के गानों ने पूरे देश में धमाल मचा दिया। कैसेट्स की बिक्री रिकॉर्ड तोड़ने लगी। रातों-रात टी-सीरीज एक बड़े म्यूजिक ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आई। इसी फिल्म ने कुमार सानू और अनुराधा पौडवाल जैसे गायकों को भी स्टार बना दिया।
गुलशन कुमार सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि वो नए टैलेंट को पहचानने वाले इंसान भी थे। उन्होंने सोनू निगम जैसे कई गायकों को बड़ा मौका दिया और उनके करियर को नई दिशा दी। बहुत से लोग उन्हें म्यूजिक इंडस्ट्री का गॉडफादर भी कहते हैं, क्योंकि उन्होंने अनगिनत कलाकारों को मंच दिया। वह खुद भी कई भक्ति गीत गा चुके हैं।
संगीत के अलावा गुलशन कुमार भक्ति और सेवा भाव के लिए भी जाने जाते थे। वे भगवान शिव और माता वैष्णो देवी के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की, जो आज भी श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराता है। वे अक्सर मंदिरों में जाते थे और अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक कार्यों और दान-पुण्य में लगाते थे।
उनकी सादगी भी लोगों को बहुत प्रभावित करती थी। इतने बड़े बिजनेस के मालिक होने के बावजूद उनमें कोई घमंड नहीं था। वे बहुत ही साधारण जीवन जीते थे और जरूरतमंदों की मदद करना उनका स्वभाव था।
टी-सीरीज के जरिए उन्होंने न सिर्फ म्यूजिक इंडस्ट्री को बदला, बल्कि भारतीय मनोरंजन जगत को एक नई दिशा दी। लेकिन उनकी जिंदगी का सफर बहुत जल्दी खत्म हो गया। 12 अगस्त 1997 को उनकी हत्या हो गई, जिसने पूरी इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया।
--आईएएनएस
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