दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान सफल, वीडियो में जाने हिंद महासागर और मैक्सिको की खाड़ी में हुई लैंडिंग
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट माने जाने वाले स्पेसएक्स के स्टारशिप ने अपनी 13वीं टेस्ट उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस ऐतिहासिक मिशन में स्टारशिप के अपर स्टेज ने हिंद महासागर में सफल लैंडिंग की, जबकि इसके सुपर हैवी बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। इस सफलता को स्पेसएक्स और नासा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस विशाल रॉकेट को तैयार किया है। स्टारशिप की यह टेस्ट उड़ान ऐसे समय में सफल हुई है, जब नासा के आगामी चंद्र मिशन की तैयारियां चल रही हैं। माना जा रहा है कि भविष्य के मून मिशन में स्टारशिप की भूमिका बेहद अहम होगी।
403 फीट ऊंचा है स्टारशिप, पूरी तरह रीयूजेबल है रॉकेट
स्टारशिप को दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रॉकेट सिस्टम माना जाता है। इसमें दो मुख्य हिस्से होते हैं- स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा)। दोनों को मिलाकर पूरे व्हीकल को ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस रॉकेट की ऊंचाई करीब 403 फीट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से रीयूजेबल (दोबारा इस्तेमाल किए जाने योग्य) बनाया गया है। इससे भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों की लागत को काफी कम करने में मदद मिल सकती है।
स्टारबेस से हुई लॉन्चिंग
स्टारशिप ने टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में स्थित स्पेसएक्स के लॉन्च सेंटर ‘स्टारबेस’ से भारतीय समयानुसार सुबह करीब 4 बजे उड़ान भरी। यह टेस्ट मिशन करीब 1 घंटे 3 मिनट तक चला। इस दौरान रॉकेट के दोनों हिस्सों की परफॉर्मेंस, उड़ान नियंत्रण, री-एंट्री सिस्टम और लैंडिंग क्षमता की जांच की गई। मिशन के सफल होने के बाद स्पेसएक्स की टीम में उत्साह देखा गया।
पहले इंजन खराबी के कारण टली थी लॉन्चिंग
स्टारशिप की इस टेस्ट उड़ान को पहले ही लॉन्च किया जाना था, लेकिन पिछले सप्ताह इंजन इग्निशन में तकनीकी खराबी आने के कारण लॉन्चिंग को टाल दिया गया था। इंजीनियरों ने समस्या की जांच और सुधार के बाद दोबारा प्रयास किया, जिसमें सफलता मिली। स्पेसएक्स लगातार स्टारशिप के डिजाइन और तकनीक में सुधार कर रही है ताकि इसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सके।
नासा के मून मिशन के लिए अहम सफलता
स्टारशिप की यह सफलता नासा के लिए भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नासा का आगामी मून लैंडिंग मिशन इसी तकनीक पर निर्भर है। अगर स्टारशिप पूरी तरह सफल साबित होता है तो यह इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने के मिशन में बड़ी भूमिका निभा सकता है। एलन मस्क की योजना स्टारशिप के जरिए न सिर्फ चंद्रमा बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह तक इंसानों को पहुंचाने की है। इस टेस्ट उड़ान की सफलता को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्टारशिप की सफल 13वीं उड़ान ने साबित कर दिया है कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में रीयूजेबल रॉकेट तकनीक गेम चेंजर साबित हो सकती है। अब पूरी दुनिया की नजरें इसके अगले परीक्षणों और नासा के आगामी मिशनों पर टिकी हैं।