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World Tiger Day 2026: भारत में सबसे ज्यादा बाघ किस राज्य में हैं? जंगल घटने से गांवों और शहरों की ओर क्यों बढ़ रहे टाइगर

 

हर साल 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में बाघों के संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करना है। भारत बाघों के संरक्षण में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। देश में दुनिया की सबसे बड़ी बाघ आबादी मौजूद है, लेकिन जंगलों के घटते क्षेत्र और बढ़ते मानवीय दबाव के कारण अब बाघों का गांवों और शहरों के आसपास पहुंचना एक नई चुनौती बनता जा रहा है।

भारत में सबसे ज्यादा बाघ किस राज्य में हैं?

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भारत में बाघों की सबसे अधिक संख्या मध्य प्रदेश में पाई जाती है। इसी वजह से मध्य प्रदेश को अक्सर "टाइगर स्टेट" भी कहा जाता है। राज्य के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे टाइगर रिजर्व बाघों के प्रमुख ठिकाने हैं।इसके बाद कर्नाटक, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते हैं। उत्तराखंड का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व भी बाघ संरक्षण के लिए देश और दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

बाघों की संख्या बढ़ना बड़ी उपलब्धि

भारत में वर्ष 1973 में शुरू किया गया प्रोजेक्ट टाइगर बाघ संरक्षण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक रहा है। इसके तहत बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, शिकार पर रोक और वैज्ञानिक निगरानी के जरिए उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया गया।आज भारत में बाघों की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की सफलता को दिखाती है। हालांकि, बढ़ती आबादी के साथ बाघों के लिए पर्याप्त जगह और संसाधन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

जंगल कम होने से क्यों गांवों की ओर आ रहे बाघ?

बाघों का प्राकृतिक क्षेत्र लगातार कम हो रहा है। जंगलों की कटाई, सड़क निर्माण, खनन, खेती का विस्तार और मानव बस्तियों के बढ़ने से वन्यजीवों के आवास प्रभावित हुए हैं।जब जंगलों में बाघों के लिए पर्याप्त जगह, भोजन और पानी उपलब्ध नहीं रहता, तो वे नए क्षेत्रों की तलाश में जंगलों से बाहर निकलने लगते हैं। कई बार वे गांवों, खेतों और शहरों के नजदीक पहुंच जाते हैं।इसके अलावा युवा बाघों को अपना नया क्षेत्र बनाने के लिए पुराने इलाकों से बाहर जाना पड़ता है। इस दौरान वे मानव आबादी के संपर्क में आ सकते हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा बड़ी चिंता

बाघों के गांवों और शहरों के आसपास आने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई बार मवेशियों के शिकार, लोगों पर हमले और बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।वन विभाग के सामने चुनौती होती है कि बाघों को सुरक्षित जंगल में वापस भेजा जाए और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों को बचाने के लिए केवल टाइगर रिजर्व बनाना पर्याप्त नहीं है। जंगलों के बीच वन्यजीव कॉरिडोर विकसित करना, प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और स्थानीय लोगों को संरक्षण से जोड़ना जरूरी है।विश्व बाघ दिवस का संदेश यही है कि बाघों की सुरक्षा और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। बाघ सुरक्षित रहेंगे तो जंगल, जैव-विविधता और पर्यावरण का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।