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हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का काम अटका, 95 करोड़ की योजना में सवा साल बाद भी नहीं खड़ा हुआ एक पिलर

 

पटना जंक्शन पर लगातार बढ़ रहे यात्रियों और ट्रेनों के दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का निर्माण फिलहाल कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच उलझता नजर आ रहा है। करीब 95 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुए सवा साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन निर्माण स्थल पर अब तक काम की ठोस शुरुआत दिखाई नहीं दे रही है। स्थिति यह है कि न तो एक भी पिलर खड़ा हो सका है और न ही टर्मिनल के निर्माण के लिए फाउंडेशन का काम पूरा हो पाया है।

यात्रियों का दबाव कम करने की थी योजना

हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल को पटना जंक्शन पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने की महत्वपूर्ण योजना के तौर पर देखा गया था। पटना जंक्शन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। इसके साथ ही ट्रेनों की संख्या और परिचालन दबाव बढ़ने के कारण स्टेशन पर लगातार भीड़ और परिचालन संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं।ऐसे में नए पैसेंजर टर्मिनल के निर्माण से ट्रेनों के परिचालन को व्यवस्थित करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई गई थी। परियोजना को समय पर पूरा करने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन निर्माण की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी।

शिलान्यास के बाद भी निर्माण की रफ्तार धीमी

करीब 95 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस टर्मिनल का शिलान्यास हुए सवा साल से ज्यादा समय हो चुका है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अभी शुरुआती स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है। निर्माण स्थल पर अब तक एक भी पिलर खड़ा नहीं किया जा सका है।सबसे अहम बात यह है कि किसी बड़े भवन या टर्मिनल के निर्माण की बुनियादी प्रक्रिया में शामिल फाउंडेशन का काम भी पूरा नहीं हुआ है। इससे परियोजना की समयसीमा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

हार्डिंग पार्क टर्मिनल का निर्माण समय पर पूरा नहीं होने का असर पटना जंक्शन पर पड़ने वाले यात्री और ट्रेनों के दबाव पर भी पड़ सकता है। जिस उद्देश्य से इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया था, वह तभी पूरा होगा जब टर्मिनल का निर्माण जल्द पूरा कर उसे परिचालन के लिए तैयार किया जाए।वर्तमान स्थिति में परियोजना की धीमी प्रगति यात्रियों के लिए प्रस्तावित अतिरिक्त सुविधाओं और ट्रेनों के बेहतर प्रबंधन की योजना को भी प्रभावित कर सकती है।

सवा साल बाद अब निगाहें निर्माण की रफ्तार पर

शिलान्यास के बाद लंबा समय बीतने के बावजूद जब निर्माण का बुनियादी ढांचा ही तैयार नहीं हो सका है, तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परियोजना जमीन पर कब गति पकड़ेगी। 95 करोड़ रुपए की इस योजना से जुड़ी उम्मीदें तभी पूरी होंगी, जब निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग काम में तेजी लाएं और तय लक्ष्य के मुताबिक टर्मिनल को पूरा करें।फिलहाल हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का मामला यह दिखाता है कि बड़ी परियोजनाओं की घोषणा और शिलान्यास के बाद वास्तविक निर्माण की गति पर निगरानी कितनी जरूरी है। पटना जंक्शन पर बढ़ते दबाव के बीच यात्रियों को अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने का इंतजार है।