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मुंबई लोकल में भीड़ से मिलेगी राहत? चर्चगेट से विरार तक जमीन के नीचे दौड़ सकती हैं ट्रेनें, रेलवे ने शुरू की तैयारी

 

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को भविष्य में राहत मिल सकती है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और जमीन के ऊपर रेल नेटवर्क के विस्तार की सीमित संभावनाओं को देखते हुए पश्चिम रेलवे चर्चगेट से विरार के बीच अंडरग्राउंड सबअर्बन रेल नेटवर्क बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

हालांकि, यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। पश्चिम रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग को फिजिबिलिटी स्टडी यानी व्यवहार्यता अध्ययन के लिए रेलवे बोर्ड से फंड की मंजूरी मिलने का इंतजार है। इस अध्ययन से पता चलेगा कि जमीन के नीचे इतना बड़ा रेल नेटवर्क बनाना तकनीकी और आर्थिक रूप से कितना संभव है।

चर्चगेट से विरार तक बनेगा अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क?

मुंबई में तेजी से बढ़ती आबादी और लोकल ट्रेनों में भारी भीड़ के कारण रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है। जमीन के ऊपर नई पटरियां बिछाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण अब भूमिगत रेल कॉरिडोर के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।

प्रस्ताव के तहत चर्चगेट से विरार के बीच जमीन के नीचे उपनगरीय रेल नेटवर्क विकसित करने की संभावना तलाशी जा रही है। इस योजना को लेकर मार्च 2026 में एक पत्र जारी किए जाने के बाद फिजिबिलिटी स्टडी कराने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके बाद रेल मंत्री के दौरे के दौरान भी परियोजना की रूपरेखा पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई।

रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद शुरू होगा अध्ययन

पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि चर्चगेट से विरार तक भूमिगत रेल नेटवर्क बनाना व्यावहारिक होगा या नहीं।

इसके लिए सबसे पहले फिजिबिलिटी स्टडी की जाएगी। रेलवे बोर्ड से फंड की मंजूरी मिलते ही यह प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यदि अध्ययन में परियोजना तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य पाई जाती है, तो आगे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।

फिलहाल, परियोजना के निर्माण की मंजूरी, लागत और काम शुरू होने की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक समय-सीमा सामने नहीं आई है।

मुंबई लोकल के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

चर्चगेट-विरार के बीच भूमिगत रेल नेटवर्क तैयार करना आसान नहीं होगा। घनी आबादी वाले शहरी इलाके में सुरंगों और स्टेशनों का निर्माण करने के लिए बड़े निवेश और विस्तृत तकनीकी योजना की जरूरत पड़ेगी।

इस परियोजना के सामने प्रमुख चुनौतियां होंगी:

  • जमीन के नीचे सुरंगों और स्टेशनों के निर्माण की तकनीकी व्यवहार्यता।

  • परियोजना की कुल लागत और वित्तीय व्यवस्था।

  • स्टेशनों के प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त जगह की उपलब्धता।

  • मौजूदा रेलवे लाइनों और मुंबई मेट्रो नेटवर्क के साथ बेहतर कनेक्टिविटी।

  • निर्माण के दौरान शहर के मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर पड़ने वाला असर।

इन सभी पहलुओं का आकलन फिजिबिलिटी स्टडी के दौरान किया जा सकता है।

MRVC भी अंडरग्राउंड कॉरिडोर की संभावनाएं तलाश रहा है

पश्चिम रेलवे के अलावा, मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन (MRVC) भी भूमिगत रेल कनेक्टिविटी से जुड़े विकल्पों का अध्ययन कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत चर्चगेट-विरार और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से परेल के बीच अंडरग्राउंड कॉरिडोर की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।इन अध्ययनों के नतीजे सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किन कॉरिडोर पर आगे काम किया जा सकता है।