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क्या अब भी महंगे रहेंगे फ्लाइट टिकट? सरकार के नए नियमों से सामने आया बड़ा सच, जानें कब तय होगी एयर फेयर की लिमिट

 

त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने किराया व्यवस्था को लेकर नए नियमों की जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के आधार पर किराया तय कर सकेंगी। हालांकि, आपातकालीन स्थिति में सरकार हस्तक्षेप कर किराए को नियंत्रित कर सकती है, ताकि यात्रियों से मनमाना पैसा न वसूला जाए।प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के किराए की जानकारी एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देनी होगी। यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करनी होगी। DGCA किराए की निगरानी करेगा, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी थी जानकारी

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि एयरलाइंस की ओर से मनमाना किराया वसूले जाने पर रोक लगाने के लिए दो सप्ताह के भीतर नए नियम लागू किए जाएंगे।अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों और छिपे हुए शुल्कों पर रोक लगाने की मांग की गई है।इस मामले में सरकार का उद्देश्य यात्रियों को किराए की पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी पर रोक लगाना है।

त्योहारों में क्यों महंगे हो जाते हैं फ्लाइट टिकट?

त्योहारी सीजन, स्कूल की छुट्टियों और लंबे वीकेंड के दौरान हवाई यात्रा की मांग बढ़ जाती है। वहीं, सीमित सीटों और उड़ानों की उपलब्धता के कारण टिकटों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।इसके अलावा, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें भी एयरलाइंस के खर्च पर असर डालती हैं। विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, ईंधन महंगा होने के कारण किराए को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस मुद्दे पर सरकार एयरलाइंस और तेल कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है।

एअर इंडिया और इंडिगो ने भी बढ़ाए थे किराए

विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद एअर इंडिया और इंडिगो ने भी अपने किराए में बदलाव किया था।एअर इंडिया ने 9 अक्टूबर से घरेलू उड़ानों पर 1,200 रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 17,800 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लगाने की घोषणा की थी। ये शुल्क एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों पर भी लागू किए गए थे।

वहीं, इंडिगो ने भी 6 अक्टूबर 2026 से ईंधन की बढ़ती लागत के चलते किराए में बढ़ोतरी की थी।एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में विमान ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में बदलाव का सीधा असर टिकटों के किराए पर पड़ता है।

आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?

अगर नए नियम लागू होते हैं, तो यात्रियों को टिकटों की कीमतों के बारे में पहले से जानकारी मिल सकेगी। इससे यात्रा की योजना बनाना और अलग-अलग एयरलाइंस के किराए की तुलना करना आसान हो सकता है।हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर फ्लाइट का किराया तय या सस्ता कर दिया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस मांग और सीटों की उपलब्धता के अनुसार किराया तय कर सकेंगी। सरकार का हस्तक्षेप आपातकालीन परिस्थितियों और लागू नियमों के दायरे में होगा।अब सबकी नजर नए नियमों के लागू होने पर है। अगर किराए की निगरानी और पारदर्शिता प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई यात्रियों को मनमानी कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।