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वंदे मातरम न गाने पर आपराधिक कार्रवाई होगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच, वीडियो में जाने 2 या 6 अंतरों पर फैसला नहीं

 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस सवाल की जांच करने पर सहमति जताई है कि धार्मिक या अंतरात्मा के आधार पर ‘वंदे मातरम’ न गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने फिलहाल यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रगीत के कितने अंतरे गाए जाने चाहिए।

मामला कर्नाटक संगीतकार और गायक टीएम कृष्णा की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाने को अनिवार्य बनाने और इसे रोकने या गायन में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान करने वाले कानून को चुनौती दी है। याचिका में गीत के बाद के अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भ का भी उल्लेख किया गया है।

धार्मिक कारण से न गाने पर कार्रवाई का सवाल

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक कारणों से राष्ट्रगीत नहीं गाने वाले व्यक्ति को आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने इस मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में जांचने की बात कही।हालांकि, कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि ‘वंदे मातरम’ केवल पहले दो अंतरों तक सीमित रहेगा या इसके सभी छह अंतरे गाए जाएंगे। इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तरों पर पहले से विवाद और कानूनी कार्यवाही चल रही है।

जुलाई में संसद ने पारित किया था संशोधन

केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में ‘Prevention of Insults to National Honour Act, 1971’ में संशोधन किया था। PIB के मुताबिक, संशोधन के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया। इसमें जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या गायन कर रहे समूह में व्यवधान पैदा करने को अपराध बनाया गया है।अब सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि इस प्रावधान की आपराधिक प्रकृति और धार्मिक या अंतरात्मा से जुड़े आपत्तियों के बीच संवैधानिक अधिकारों का संतुलन किस तरह तय किया जाए। फिलहाल मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं आया है और आगे की सुनवाई केंद्र के जवाब के बाद होगी।