सहारनपुर में 115 साल पुरानी कलेक्ट्रेट मस्जिद पर कार्रवाई के बाद क्यों मचा बवाल? जानें जमीनी हकीकत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को गिराए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। शनिवार सुबह करीब 4 बजे प्रशासन ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। मौके पर करीब 6 बुलडोजर लगाए गए, जबकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने लोगों को मस्जिद के आसपास जाने से रोक दिया है। वहीं, कार्रवाई का विरोध करने सहारनपुर पहुंच रहीं कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने की बात भी सामने आई है।
इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने प्रशासन और सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे संविधान और कानून के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका दावा है कि यह मस्जिद 1911 से पहले की है और इसके स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन पर अवैध रूप से बनी थी। प्रशासन के मुताबिक, 2025 में शिकायत मिलने के बाद मजिस्ट्रेट जांच कराई गई थी, जिसमें निर्माण को अवैध पाया गया।
इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई शुरू हुई। 16 जुलाई 2026 को अदालत ने मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे हटाने और 6.41 करोड़ रुपये की हर्जाना राशि वसूलने का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी।
प्रशासन के अनुसार, 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि प्रशासन ने अदालत के आदेश के तहत कार्रवाई की है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस कार्रवाई के बाद सहारनपुर में सियासी हलचल तेज हो गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।