हमेशा सफेद जर्सी में ही क्यों खेला जाता है टेस्ट मैच? नहीं जानते होंगे जवाब
भारत में लोग क्रिकेट को खेल कम और त्योहार ज़्यादा मानते हैं। यहां के लोगों में क्रिकेट के लिए जुनून किसी भी दूसरे खेल से ज़्यादा है। आपको हर गली-मोहल्ले में बच्चे क्रिकेट खेलते हुए मिल जाएंगे। अगर आप शनिवार और रविवार को पार्क में जाएंगे, तो आपको बड़े भी क्रिकेट खेलते हुए मिल जाएंगे। खास बात यह है कि क्रिकेट यहां के लोगों के खून में है, और वे इसे बड़े मज़े से खेलते और देखते हैं। हो सकता है आप भी ऐसे ही लोगों में से एक हों, और अगर ऐसा है, तो मेरा आपसे एक सवाल है।
टेस्ट मैच सिर्फ़ सफ़ेद जर्सी में ही क्यों खेले जाते हैं?
हो सकता है आपने नॉर्मल कपड़ों में क्रिकेट खेला हो, लेकिन जब भी आपने खिलाड़ियों को क्रिकेट खेलते देखा होगा, तो उन्हें उनकी जर्सी में ही देखा होगा। हर देश की अपनी जर्सी होती है, जो अलग-अलग रंगों की होती है, लेकिन टेस्ट मैच सफ़ेद जर्सी में खेले जाते हैं। ऐसा क्यों है? आइए इसके पीछे का कारण बताते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ट मैच में सफ़ेद जर्सी पहनना पूरी तरह से प्रैक्टिकल है, क्योंकि पूरे दिन धूप में खेलने पर सफ़ेद रंग धूप को रिफ्लेक्ट करने और उसे कम करने में मदद करता है। इससे खिलाड़ी ज़्यादा देर तक मैदान पर टिक पाते हैं।
टेस्ट मैच में सिर्फ़ लाल गेंद ही क्यों?
अब, मेरा आपसे एक और सवाल है। आपने देखा होगा कि ODI और T20 मैचों में सफ़ेद गेंद का इस्तेमाल होता है, लेकिन टेस्ट मैचों में लाल गेंद का इस्तेमाल होता है। ऐसा क्यों है? मैं आपको बता दूँ कि जर्सी सफ़ेद होने की वजह से सफ़ेद गेंद को देखना मुश्किल होता है, इसीलिए टेस्ट मैच लाल गेंद से खेले जाते हैं। लाल गेंद बहुत आसानी से दिखाई देती है।