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रेलवे स्टेशनों के नाम के पीछे क्यों लिखा होता है ‘रोड’? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

 

आपने ट्रेन से सफर करते समय कई बार ऐसे स्टेशन के नाम जरूर देखे होंगे, जिनके आखिर में “रोड” (Road) लिखा होता है। जैसे—“दिल्ली रोड”, “जयपुर रोड” या “कानपुर रोड”। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन स्टेशनों के नाम के साथ “रोड” क्यों जोड़ा जाता है? इसके पीछे एक खास वजह छिपी होती है।

दरअसल, Indian Railways में “रोड” शब्द का इस्तेमाल किसी शहर या कस्बे से दूरी और कनेक्टिविटी को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसका मतलब यह होता है कि वह रेलवे स्टेशन मुख्य शहर से थोड़ा दूर स्थित है और वहां से उस शहर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग (रोड) का इस्तेमाल करना पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी स्टेशन का नाम “XYZ रोड” है, तो इसका सीधा अर्थ है कि यह स्टेशन XYZ शहर के भीतर नहीं, बल्कि उसके पास या बाहरी इलाके में स्थित है। यात्रियों को उस शहर तक पहुंचने के लिए स्टेशन से आगे सड़क के जरिए यात्रा करनी होगी।

ऐसा नामकरण खासतौर पर उस समय किया गया था, जब रेलवे नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा था और हर छोटे शहर या कस्बे के अंदर स्टेशन बनाना संभव नहीं था। ऐसे में पास के इलाके में स्टेशन बनाकर उसका नाम शहर के साथ “रोड” जोड़कर रखा गया, ताकि यात्रियों को यह समझने में आसानी हो कि यह स्टेशन उस शहर तक पहुंचने का एक प्रमुख मार्ग है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम आज भी यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी है, क्योंकि इससे उन्हें यह अंदाजा लग जाता है कि उनका गंतव्य स्टेशन से कितनी दूरी पर हो सकता है और आगे की यात्रा के लिए उन्हें क्या व्यवस्था करनी होगी।

दिलचस्प बात यह है कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों में भी इस तरह की नामकरण पद्धति अपनाई जाती है, जहां “रोड”, “जंक्शन” या “टर्मिनल” जैसे शब्द स्टेशन की स्थिति और महत्व को दर्शाते हैं।

इस तरह, अगली बार जब आप किसी स्टेशन के नाम के साथ “रोड” लिखा देखें, तो समझ जाइए कि यह स्टेशन उस शहर के बाहरी इलाके में स्थित है और आपको वहां से आगे सड़क के जरिए अपनी यात्रा पूरी करनी होगी।