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हर कत्ल के बाद बीड़ी क्यों पीता था सीरियल किलर? रहस्यमयी आदत के पीछे क्या था राज

 

‘कनपट्टीमार किलर’ नाम सुनते ही राजस्थान के अपराध जगत से जुड़ी एक बेहद खौफनाक कहानी सामने आती है। यह नाम ऐसे अपराधी के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसकी पहचान लोगों को डराकर और बेहद बेरहमी से वारदात करने वाले शख्स के रूप में बनी। ‘कनपट्टीमार’ नाम उसकी वारदात करने की कथित शैली से जुड़ा था।

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क्यों पड़ा ‘कनपट्टीमार’ नाम?

स्थानीय अपराध की कहानियों और पुराने किस्सों में बताया जाता है कि वह अपने शिकार पर अचानक हमला करता था। कनपटी के पास वार करना उसकी कथित पहचान बन गया था। इसी वजह से लोगों के बीच उसे ‘कनपट्टीमार’ कहा जाने लगा।

उस दौर में पुलिस के पास आज जैसी आधुनिक तकनीक और जांच के साधन नहीं थे। ऐसे में अपराधियों को पकड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था।

लोगों में बना रहता था डर

कनपट्टीमार के नाम से इलाके के लोगों में दहशत की चर्चा मिलती है। रात के समय अकेले निकलने से लोग बचते थे और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्क रहते थे।

उसकी कहानी केवल अपराध तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय के साथ यह स्थानीय लोककथाओं का हिस्सा भी बन गई। अलग-अलग इलाकों में इससे जुड़ी कहानियों के अलग-अलग संस्करण सुनने को मिलते हैं।

पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

कथित तौर पर लगातार वारदातों के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज की। उसके बारे में जानकारी जुटाने और पुराने मामलों को जोड़ने की कोशिश की गई। आखिरकार पुलिस उसके करीब पहुंची और उसे गिरफ्तार किए जाने की कहानी सामने आती है।

हालांकि ‘कनपट्टीमार किलर’ से जुड़ी कई बातें स्थानीय कथाओं और पुराने समाचारों में अलग-अलग रूप में मिलती हैं, इसलिए किसी व्यक्ति की पहचान, हत्या की संख्या या घटनाओं के बारे में निश्चित दावा करने से पहले विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

अपराध की कहानी से लोककथा तक

कनपट्टीमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह किसी कुख्यात अपराधी का नाम लंबे समय तक स्थानीय समाज की स्मृति में बना रह सकता है। अपराध की वास्तविक घटनाओं के साथ लोगों की सुनी-सुनाई बातें जुड़ती जाती हैं और धीरे-धीरे वह कहानी लोककथा का रूप ले लेती है।