आखिर क्यों करणी माता मंदिर में पूजे जाते हैं चूहे, भक्त खाते हैं उनका झूठा प्रसाद
करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और यहां बड़ी संख्या में रहने वाले चूहों के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। स्थानीय श्रद्धालु इन चूहों को ‘काबा’ कहते हैं और इन्हें करणी माता के परिवार का रूप मानकर सम्मान देते हैं।
600 साल से ज्यादा पुराना इतिहास
मंदिर का इतिहास करीब 600 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। करणी माता को राजस्थान के लोकविश्वास में मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में लोगों की सहायता की और क्षेत्र में धार्मिक एवं सामाजिक प्रभाव छोड़ा।
मंदिर का वर्तमान स्वरूप कई वर्षों में विकसित हुआ। इसके निर्माण और सजावट में राजघराने का भी योगदान रहा। मंदिर के मुख्य द्वार पर लगे चांदी के विशाल दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
चूहों के कारण दुनिया में अलग पहचान
करणी माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां रहने वाले हजारों चूहे हैं। मान्यता है कि इन चूहों को नुकसान पहुंचाना या उनका अपमान करना शुभ नहीं माना जाता। श्रद्धालु उन्हें प्रसाद खिलाते हैं और उनके बीच से गुजरकर दर्शन करते हैं।
मंदिर परिसर में चूहों के लिए दूध, अनाज और अन्य खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जाती है। कई श्रद्धालु इस बात को विशेष शुभ मानते हैं कि उन्हें सफेद चूहा दिखाई दे जाए। सफेद चूहे दुर्लभ माने जाते हैं और उन्हें करणी माता से जुड़ा विशेष संकेत माना जाता है।
चूहों से जुड़ी धार्मिक मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार करणी माता के अनुयायियों और उनके परिवार के सदस्यों के पुनर्जन्म से चूहों का संबंध माना जाता है। इसी कारण मंदिर में इन जीवों को सामान्य चूहे नहीं, बल्कि पवित्र काबा के रूप में देखा जाता है।
मंदिर आने वाले श्रद्धालु चूहों को प्रसाद खिलाते हैं। यहां की परंपरा में चूहों द्वारा खाया हुआ प्रसाद भी भक्तों के लिए पवित्र माना जाता है।
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक का यह मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष मेले का आयोजन होता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
करणी माता मंदिर राजस्थान की धार्मिक परंपराओं, लोकविश्वास और स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण है। मंदिर की सबसे खास बात यही है कि यहां आस्था और प्रकृति से जुड़ी एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है।