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किसकी मुश्तैदी पड़ी भारी? टाइगर श्रॉफ फायरिंग के शूटरों की गिरफ्तारी का श्रेय लेने की होड़ में आमने-सामने राजस्थान और मुंबई पुलिस

 

टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई पुलिस और राजस्थान पुलिस के बीच श्रेय लेने की चर्चा शुरू हो गई है। वारदात मुंबई में हुई, लेकिन आरोपियों को राजस्थान के कोटा में पकड़ा गया। इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस ने अहम जानकारी जुटाई, जबकि कोटा पुलिस ने तेजी से ऑपरेशन चलाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मुंबई पुलिस ने जुटाए अहम सुराग

मामले की जांच के दौरान मुंबई पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपियों की पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस को पता चला कि तीनों आरोपी ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं। बताया गया कि मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को आरोपियों के चेहरे, ट्रेन की जानकारी और उस बोगी का विवरण भी दिया, जिसमें वे सवार थे।यानी आरोपियों की पहचान करने और उनकी लोकेशन का पता लगाने में मुंबई पुलिस की भूमिका अहम रही। इसी इनपुट के आधार पर राजस्थान पुलिस को कार्रवाई करने में मदद मिली।

कोटा पुलिस ने 15 मिनट में की ट्रेन की जांच

मुंबई पुलिस से जानकारी मिलने के बाद कोटा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। आरोपियों के जनरल बोगी में होने की वजह से उन्हें भीड़ का फायदा उठाकर भागने का मौका मिल सकता था। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस ने स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी बढ़ाई। इस कार्रवाई में रेलवे पुलिस ने भी सहयोग किया।कोटा की एसपी तेजस्वनी के मुताबिक, दूसरी एजेंसी से मिली जानकारी पर उनकी टीम ने तेजी से काम किया और महज 15 मिनट में पूरी ट्रेन की जांच कर आरोपियों को पकड़ लिया। उन्होंने राजस्थान पुलिस को पेशेवर पुलिस बल बताते हुए टीम की त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।

मुंबई पुलिस कमिश्नर की टिप्पणी ने बढ़ाई चर्चा

गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई का श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस सवाल पर चर्चा तेज हो गई। मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती की टिप्पणी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने लिखा, 'सफलता के सौ बाप होते हैं, असफलता का कोई नहीं होता।'इस बयान को कुछ लोगों ने कार्रवाई का श्रेय लेने की कोशिशों पर तंज के रूप में देखा। हालांकि, टिप्पणी के पीछे उनका सटीक आशय क्या था, इसे लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई।

आखिर किसे मिलना चाहिए क्रेडिट?

पूरे घटनाक्रम को देखें तो मुंबई पुलिस ने जांच, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की यात्रा से जुड़ी जानकारी जुटाकर अहम भूमिका निभाई। वहीं, राजस्थान पुलिस ने मिले इनपुट पर तेजी से कार्रवाई की और कोटा में आरोपियों को गिरफ्तार किया। रेलवे पुलिस का सहयोग भी इस ऑपरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।ऐसे मामलों में सफलता किसी एक पुलिस बल की नहीं, बल्कि आपसी तालमेल और समय पर की गई कार्रवाई की होती है। मुंबई पुलिस के बिना आरोपियों तक पहुंचने का सुराग मिलना मुश्किल हो सकता था, जबकि कोटा पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बिना गिरफ्तारी में देरी हो सकती थी।