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जहां पानी के किनारे चट्टानों पर घूमते हैं तेंदुए, वीडियो में जानिए राजस्थान की इस अनोखी जगह की पूरी कहानी

 

राजस्थान के पाली जिले में अरावली की चट्टानी पहाड़ियों के बीच बना जवाई बांध सिर्फ पानी का बड़ा जलाशय नहीं है। यह ऐसा इलाका है, जहां एक तरफ विशाल जलराशि दिखाई देती है तो दूसरी तरफ पहाड़ियों और गुफाओं में तेंदुओं का बसेरा नजर आता है। जवाई की यही अनोखी प्राकृतिक दुनिया इसे राजस्थान के प्रमुख वाइल्डलाइफ पर्यटन स्थलों में शामिल करती है।

जवाई बांध जवाई नदी पर बनाया गया है, जो आगे चलकर लूणी नदी की सहायक नदी बनती है। बांध सुमेरपुर के आसपास स्थित है और सिंचाई तथा जलापूर्ति के लिहाज से पश्चिमी राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार के एक स्रोत के अनुसार जवाई बांध का निर्माण 1946 में महाराजा उम्मेद सिंह के समय शुरू हुआ और 1956 में पूरा हुआ।

पानी की जरूरत पूरी करने के लिए बना था बांध

जवाई बांध के निर्माण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना और सिंचाई को बढ़ावा देना था। समय के साथ यह जलाशय आसपास के क्षेत्रों की जल जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश होने पर इसका पानी आसपास के इलाके के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है।

जवाई बांध के आसपास का इलाका अपनी भौगोलिक बनावट के कारण भी खास है। यहां बड़े-बड़े ग्रेनाइट पत्थरों और चट्टानी पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक गुफाएं बनी हुई हैं।

चट्टानों में रहते हैं तेंदुए

जवाई की सबसे बड़ी पहचान यहां रहने वाले तेंदुए हैं। चट्टानी पहाड़ियां और प्राकृतिक गुफाएं इन वन्यजीवों को रहने और छिपने के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराती हैं। यही कारण है कि जवाई को देश के प्रमुख तेंदुआ सफारी क्षेत्रों में गिना जाता है।

राजस्थान वन विभाग के रिकॉर्ड में जवाई बांध पैंथर कंजर्वेशन रिजर्व के दो क्षेत्र दर्ज हैं। 2024 की वन्यजीव गणना में जवाई डैम पैंथर कंजर्वेशन रिजर्व-I में 15 और रिजर्व-II में 19 तेंदुए दर्ज किए गए थे।

इंसान और तेंदुओं का अनोखा सह-अस्तित्व

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जवाई की खासियत सिर्फ तेंदुओं की मौजूदगी नहीं है। यहां लंबे समय से स्थानीय ग्रामीण समुदाय और वन्यजीव एक ही प्राकृतिक क्षेत्र में रहते आए हैं। जवाई के आसपास राबारी समुदाय की पारंपरिक पशुपालक संस्कृति भी देखने को मिलती है।

पर्यटन से जुड़े स्रोतों के अनुसार, यहां तेंदुए चट्टानी पहाड़ियों में रहते हैं और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पशुपालक समुदाय अपनी पारंपरिक जीवनशैली के साथ मौजूद है। यही इंसान और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व जवाई को दूसरे सफारी क्षेत्रों से अलग पहचान देता है।

मगरमच्छ और प्रवासी पक्षी भी आकर्षण

जवाई बांध केवल तेंदुओं के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। जलाशय और उसके आसपास के क्षेत्र में मगरमच्छ तथा कई तरह के पक्षी भी दिखाई देते हैं। सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से यहां का प्राकृतिक नजारा और आकर्षक हो जाता है।

सुबह और शाम के समय बांध के आसपास की चट्टानों पर नजर दौड़ाने पर वन्यजीवों को देखने का मौका मिल सकता है। हालांकि, जंगल में किसी वन्यजीव के दिखाई देने की कोई गारंटी नहीं होती और सफारी के दौरान वन विभाग तथा स्थानीय गाइड के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

जवाई आज बन चुका है वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन

आज जवाई बांध राजस्थान के उन पर्यटन स्थलों में शामिल है जहां इतिहास, पानी, पहाड़, ग्रामीण संस्कृति और वन्यजीव एक साथ देखने को मिलते हैं। राजस्थान वन विभाग ने जवाई बांध और आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग संरक्षण क्षेत्र अधिसूचित किए हैं।

यही वजह है कि जवाई की पहचान अब सिर्फ एक बांध के रूप में नहीं, बल्कि तेंदुओं की चट्टानी दुनिया और प्राकृतिक पर्यटन के अनोखे केंद्र के रूप में भी बन चुकी है। यहां का शांत जलाशय और उसके चारों ओर फैली अरावली की चट्टानें राजस्थान के पारंपरिक किलों और महलों से अलग एक बिल्कुल अलग तरह का पर्यटन अनुभव देती हैं।