×

नवरात्रि में कब करें कन्या पूजन? जानें अष्टमी और नवमी की सही तिथि

 

चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इन दोनों दिनों में कन्या पूजन का विधान है, जिसमें छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन व उपहार दिए जाते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ इस परंपरा को निभाते हैं।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/olTRYEfQffM?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/olTRYEfQffM/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

कब करें कन्या पूजन?

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में अष्टमी तिथि 26 मार्च 2026 को पड़ रही है, जबकि नवमी तिथि 27 मार्च 2026 को है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी सुविधा और मान्यता के अनुसार इन दोनों में से किसी भी दिन कन्या पूजन कर सकते हैं।कुछ लोग महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन को अधिक शुभ मानते हैं, वहीं कई लोग महानवमी पर यह पूजा करते हैं। दोनों ही तिथियों का अपना-अपना धार्मिक महत्व है।

कन्या पूजन का महत्व

इस दिन 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन किया जाता है। उनके पैर धोकर उन्हें तिलक लगाया जाता है और भोजन कराया जाता है। इसके बाद उन्हें उपहार, वस्त्र और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है।मान्यता है कि कन्या पूजन से माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और आदर का प्रतीक भी मानी जाती है।

क्या रखें ध्यान?

पूजन के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कन्याओं को सम्मानपूर्वक बैठाकर उन्हें प्रसाद स्वरूप पूरी, हलवा और चने का भोग दिया जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में होने वाला यह कन्या पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में बेटियों के सम्मान और उनके महत्व को भी दर्शाता है।