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पत्नी गई मायके तो हैवान बन गया पिता, पहले खिलाई मिठाई, फिर तीन बच्चों की ली जान, खुद थाने पहुंचकर किया सरेंडर

 

एक दिल दहला देने वाली और बेहद भयावह घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। यहां एक पिता ने अपनी पत्नी के मायके जाने के दौरान अपने तीन बच्चों की हत्या कर दी और बाद में खुद थाने जाकर सरेंडर कर दिया। घटना ने समाज में गहरी चिंता और सदमा पैदा कर दिया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी [पिता का नाम] (उम्र) वर्ष का था। वह अपने परिवार के साथ [शहर/गांव] में रहता था। मृतक बच्चे क्रमशः [बच्चों की उम्र] वर्ष के थे। मंगलवार की सुबह आरोपी ने अपने बच्चों को मिठाई खिलाई और खेल-खेल में उनके साथ समय बिताया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसने बेरहमी से बच्चों की हत्या कर दी।

पड़ोसियों और परिवार के सदस्यों ने बताया कि आरोपी का व्यवहार पहले से ही असामान्य था। उसकी पत्नी कुछ दिन पहले ही अपने मायके गई थी। इसी दौरान आरोपी ने इस भयावह कदम को अंजाम दिया। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि वह पहले शांत और सामान्य लग रहा था, जिससे किसी को शक नहीं हुआ।

हत्या के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि उसने यह कदम गुस्से और मानसिक तनाव में उठाया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया और बच्चे की मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम के बाद की।

पुलिस अधिकारी [अधिकारी का नाम] ने कहा, "यह घटना बेहद दुखद और गंभीर है। आरोपी पिता के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। हम पूरी जांच कर रहे हैं और परिवार के सभी पहलुओं की जानकारी ले रहे हैं।"

स्थानीय लोग इस घटना से सदमे में हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू तनाव पर समाज की चेतना बढ़ाने की जरूरत को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में समय रहते मदद लेने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा और परिवारिक तनाव के कारण अक्सर मानसिक असंतुलन से जुड़े कृत्य सामने आते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार और समाज को सतर्क रहना आवश्यक है।

पुलिस अब आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है। वह यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस भयावह कदम के पीछे और क्या कारण थे और क्या आरोपी ने कोई योजना बनाई थी। आरोपी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

इस घटना ने पूरे इलाके में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। लोग कह रहे हैं कि समाज और परिवार को बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक जिम्मेदार बनना होगा। पुलिस ने भी आम जनता से आग्रह किया है कि किसी भी असामान्य व्यवहार या मानसिक तनाव के संकेत मिलने पर तुरंत मदद लें।

यह मामला एक बार फिर घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव और बच्चों की सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर करता है।