देशभर में मौसम का कहर, वीडियो में जाने आंधी, बारिश और ओलों के साथ उत्तर में बर्फबारी ने बढ़ाई ठंड
देशभर के कई राज्यों में पिछले दो दिनों से मौसम की अप्रत्याशित गतिविधियों ने लोगों की जिंदगी प्रभावित कर दी है। इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने मंगलवार को पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के 16 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के तहत बिहार, झारखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं।
मौसम विभाग ने कहा है कि इन राज्यों में तेज हवाओं, भारी बारिश और ओलों की संभावना है। स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आपात स्थिति में राहत कार्य के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों ने नागरिकों से सलाह दी है कि वे अपने घरों और वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आवश्यक नहीं होने पर बाहर न निकलें।
उत्तरी राज्यों में मार्च में अचानक हुई बर्फबारी ने सर्दी को फिर लौटाया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। भारी बर्फबारी के कारण कई सड़क मार्ग बंद हो गए हैं। गुरेज-बांदीपोरा रोड, सिंथन-किश्तवाड़ रोड और मुगल रोड को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं जोजिला दर्रे पर बर्फ जमने से श्रीनगर-लेह हाईवे भी पूरी तरह बंद हो गया है।
उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार रात भारी बर्फबारी हुई। बद्रीनाथ धाम का मंदिर परिसर बर्फ की मोटी चादर से ढक गया है। इसके कारण तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने वाले लोग सतर्क रहें और केवल जरूरी कार्य के लिए ही बाहर निकलें।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मार्च में बर्फबारी और ओलों की यह गतिविधि असामान्य नहीं है, लेकिन इसकी तीव्रता पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अधिक रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन के संकेत भी हो सकते हैं, जिसके चलते मौसम पैटर्न अस्थिर होते जा रहे हैं।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 24 घंटों में बारिश और आंधी की गतिविधि बढ़ सकती है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली कटौती, पेड़ गिरने और छोटी नदियों में जलस्तर बढ़ने की संभावना है। वहीं दक्षिण भारत में तेज हवाओं और ओलों से फसलों को नुकसान होने का खतरा है।
स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को सक्रिय कर दिया है। सड़कों और हाईवे पर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बचाव दल तैनात किए गए हैं। स्कूलों और कार्यालयों में सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोग मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखें और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण अचानक बर्फीले तूफान या हिमस्खलन का खतरा भी बना रहता है।
देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम ने अपनी शक्ति दिखाई है। पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में तेज बारिश और ओले, जबकि उत्तर में बर्फबारी और ठंड, दोनों ही नागरिकों और प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं।