लद्दाख के द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर की झील से पानी का रिसाव शुरू, वीडियो में देंखे वैज्ञानिकों ने डाला डेरा; खतरा बढ़ा तो तोड़कर निकालेंगे पानी
लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र में स्थित द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के मुहाने पर बनी झील से पानी का रिसाव शुरू हो गया है। बीते कुछ वर्षों में इस झील का आकार तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक ग्लेशियर के पास ही कैंप लगाकर झील की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिक झील में पानी की मात्रा, गहराई और ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार की रियल टाइम निगरानी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य झील में लगातार बढ़ रहे पानी और उससे पैदा होने वाले संभावित खतरे का समय रहते आकलन करना है।
झील पर बढ़ रहा पानी का दबाव
द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर करीब 24 किलोमीटर लंबा है। ग्लेशियर के पीछे हटने के कारण उसके मुहाने पर पानी जमा होने से प्रो-ग्लेशियल झील का निर्माण हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में झील के क्षेत्रफल में काफी वृद्धि दर्ज की गई है।जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 में झील का क्षेत्रफल करीब 16 हेक्टेयर था। 2023 तक इसका विस्तार बढ़कर लगभग 39 हेक्टेयर हो गया। झील में पानी की मात्रा बढ़ने के कारण वैज्ञानिक इसकी स्थिति को लगातार मॉनिटर कर रहे हैं।
खतरा बढ़ा तो सुरक्षित तरीके से निकाला जाएगा पानी
वैज्ञानिकों की टीम झील के पानी के स्तर, गहराई और ग्लेशियर के पिघलने की गति पर लगातार नजर रख रही है। अगर पानी का दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंचता है तो अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की योजना पर काम किया जा सकता है।इसका उद्देश्य झील में अचानक पानी का स्तर बढ़ने या किसी संभावित ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ जैसी स्थिति से होने वाले नुकसान को कम करना है।
नेपाल की आपदा के बाद बढ़ी निगरानी
नेपाल में हाल में हुई आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र में मौजूद संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी और तेज कर दी गई है। वैज्ञानिकों और संबंधित एजेंसियों का फोकस ऐसी झीलों में पानी के स्तर और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों पर है।द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर की झील पर वैज्ञानिकों का मौके पर रहकर अध्ययन कना इसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। रियल टाइम डेटा के आधार पर झील की स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि पानी का दबाव बढ़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।