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वीडियो में देखें संत प्रेमानंद से मिले, जिंदा शहीद बोले मेरी किडनी ले लीजिए महाराज, आपसे मिलकर मेरी सभी इच्छाएं पूरी हो चुकीं

 

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में एक भावुक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। यह मुलाकात न केवल आध्यात्मिक चर्चा तक सीमित रही, बल्कि इसमें भावनाओं और श्रद्धा का गहरा प्रभाव भी देखने को मिला।

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मुलाकात के दौरान मनिंदरजीत सिंह बिट्टा भावुक हो गए और अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई जवानों को देश की रक्षा करते हुए शहीद होते देखा है, लेकिन इसके बावजूद वह आज भी जीवित हैं। बिट्टा ने इसे ईश्वर और संतों की कृपा बताया।

बिट्टा ने आगे कहा कि उनके जीवन की सभी इच्छाएं अब पूरी हो चुकी हैं और अब वह अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा संत प्रेमानंद महाराज को समर्पित करना चाहते हैं। इसी भावुक क्षण में उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी किडनी संत प्रेमानंद महाराज को समर्पित करना चाहते हैं।

उनकी इस बात पर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। हालांकि, संत प्रेमानंद महाराज ने उनके इस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार करते हुए कहा कि इसके लिए वह साधुवाद करते हैं, लेकिन उन्होंने जीवनभर एक संकल्प लिया है कि वह किसी के शरीर का एक बूंद खून भी अपने शरीर में नहीं लेंगे। उनके इस जवाब को संयम और आध्यात्मिक दृढ़ता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

संत प्रेमानंद महाराज ने अपने उत्तर में सेवा, त्याग और आध्यात्मिक मार्ग के महत्व को भी अप्रत्यक्ष रूप से दर्शाया। उनकी बातों से स्पष्ट हुआ कि वे शरीर के दान से अधिक आत्मिक और आध्यात्मिक साधना को प्राथमिकता देते हैं।

इस मुलाकात ने वृंदावन के आध्यात्मिक माहौल में एक विशेष चर्चा को जन्म दिया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक लोग इस भावुक मुलाकात और दोनों व्यक्तित्वों के विचारों पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

जहां एक तरफ बिट्टा के समर्पण भाव की सराहना की जा रही है, वहीं संत प्रेमानंद महाराज के संयमित और स्पष्ट दृष्टिकोण को भी आध्यात्मिक अनुशासन का उदाहरण माना जा रहा है।