500 साल में एक बार ही काबू हुआ कुंभलगढ़? युद्ध से ज्यादा पानी ने बदली थी बाजी, जानिए 7 रोचक किस्से
राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला भारत के सबसे विशाल और ऐतिहासिक दुर्गों में गिना जाता है। मेवाड़ की सुरक्षा व्यवस्था में इस किले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसकी सबसे खास पहचान इसकी विशाल परकोटा दीवार है, जो पहाड़ियों के उतार-चढ़ाव के साथ करीब 36 किलोमीटर तक फैली हुई है। इसी कारण इसे अक्सर ‘भारत की महान दीवार’ भी कहा जाता है।
महाराणा कुंभा ने करवाया निर्माण
कुंभलगढ़ का वर्तमान किला मुख्य रूप से महाराणा कुंभा के शासनकाल में 15वीं शताब्दी में बनवाया गया था। निर्माण कार्य में वास्तुकार मंडन की भूमिका का उल्लेख मिलता है। किले का निर्माण अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर इस तरह किया गया कि प्राकृतिक भौगोलिक स्थिति ही इसकी सुरक्षा का हिस्सा बन गई।कुंभलगढ़ के निर्माण का उद्देश्य मेवाड़ की सुरक्षा मजबूत करना था। चित्तौड़गढ़ पर संकट के समय कुंभलगढ़ मेवाड़ के शासकों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षित स्थान के रूप में काम करता था।
महाराणा प्रताप का जन्मस्थान
कुंभलगढ़ का इतिहास महाराणा प्रताप से भी गहराई से जुड़ा है। इतिहास के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ में हुआ था। इसलिए यह किला राजस्थान के गौरव और महाराणा प्रताप की वीरता की स्मृतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है।महाराणा प्रताप के जीवन और मेवाड़ के संघर्ष को समझने में कुंभलगढ़ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
किले की अभेद्य दीवार
कुंभलगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल पत्थर की दीवार है। यह कई स्थानों पर काफी चौड़ी है और इसके ऊपर सैनिकों की आवाजाही तथा निगरानी के लिए रास्ता बनाया गया था। किले में कई बुर्ज और मजबूत प्रवेश द्वार बनाए गए थे।किले के प्रमुख द्वारों में राम पोल, हनुमान पोल और विजय पोल विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन विशाल द्वारों को इस तरह बनाया गया था कि दुश्मन के लिए किले में प्रवेश करना आसान न हो।
किले के अंदर मंदिर और महल
कुंभलगढ़ परिसर में बड़ी संख्या में मंदिर मौजूद हैं। इनमें हिंदू और जैन परंपरा से जुड़े मंदिर शामिल हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर यहां के प्रमुख मंदिरों में से एक है।किले के भीतर महल और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं भी मौजूद हैं। बादल महल किले के सबसे ऊंचे हिस्सों में स्थित है। यहां से अरावली की पहाड़ियों और आसपास के क्षेत्र का शानदार दृश्य दिखाई देता है।
मेवाड़ की सुरक्षा का मजबूत केंद्र
कुंभलगढ़ की भौगोलिक स्थिति ने इसे सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाया। ऊंची पहाड़ियों, मजबूत दीवारों और सीमित प्रवेश मार्गों के कारण इस दुर्ग पर हमला करना आसान नहीं था।किले के आसपास का क्षेत्र भी प्राकृतिक रूप से सुरक्षा प्रदान करता था। यही वजह थी कि संकट के समय मेवाड़ के शासकों के लिए कुंभलगढ़ महत्वपूर्ण आश्रय स्थल बन गया।
यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल
कुंभलगढ़ किला राजस्थान के ‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ समूह का हिस्सा है। इसे 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इस समूह में राजस्थान के छह प्रमुख पहाड़ी किले शामिल हैं।आज कुंभलगढ़ राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। इसकी विशाल दीवारें, पहाड़ी पर स्थित महल, मंदिर और आसपास का प्राकृतिक दृश्य देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।कुंभलगढ़ केवल एक ऐतिहासिक किला नहीं, बल्कि मेवाड़ की सैन्य शक्ति, स्थापत्य कला और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है। इसकी दीवारों में महाराणा कुंभा की दूरदर्शिता से लेकर महाराणा प्रताप के जन्म तक राजस्थान के इतिहास के कई महत्वपूर्ण अध्याय समाए हुए हैं।