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वक्फ बोर्ड का जल्द गठन किया जाए और पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल की जांच हो: मौलाना शहाबुद्दीन

 

बरेली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने मुर्शिदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर से अपील की है कि वे प्रस्तावित मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद न रखें, ताकि किसी नए विवाद और टकराव की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने कहा कि मस्जिद का निर्माण जरूर किया जाए, लेकिन उसके लिए कोई दूसरा अच्छा नाम चुना जाए। इसके अलावा, मौलाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का जल्द गठन करने और उसमें कट्टरपंथी विचारधारा के बजाय सुन्नी सूफी विचारधारा से जुड़े लोगों को जिम्मेदारी देने की मांग की है।

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि मौजूदा समय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ भंग चल रहा है। कई महीनों से बोर्ड का गठन नहीं होने के कारण मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और ईदगाहों का संचालन करने वाली कमेटियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कई लोगों ने उनसे इस मामले में पहल करने का आग्रह किया था। इसी के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बोर्ड का गठन जल्द कराने की मांग की है। मौलाना ने आरोप लगाया कि वर्षों तक वक्फ बोर्ड पर कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों का कब्जा रहा और इस दौरान वक्फ की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व चेयरमैन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह करीब 16-17 साल तक इस पद पर रहे और उनके कार्यकाल में करोड़ों रुपये की जमीनों की खरीद-फरोख्त हुई तथा संपत्तियों को कथित तौर पर कम कीमत पर बेचा गया। मौलाना ने पूर्व चेयरमैन को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आजम खान का करीबी भी बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से पूरे कार्यकाल की जांच कराने की मांग की, ताकि वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। मौलाना ने कहा कि नए बोर्ड में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए, जिनकी विचारधारा कट्टरपंथी हो। इसके बजाय सुन्नी सूफी विचारधारा के लोगों को स्थान दिया जाना चाहिए। वक्फ संपत्तियां बुजुर्गों ने गरीब, कमजोर, जरूरतमंद, अनाथ और विधवा महिलाओं की मदद के उद्देश्य से समर्पित की थीं। इसलिए इन संपत्तियों से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल भी जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए। मौलाना ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में जिम्मेदार रहे लोगों ने इस उद्देश्य के अनुसार काम नहीं किया और वक्फ की आमदनी का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचा। वक्फ की संपत्तियों से गरीब मुसलमानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मदद मिलनी चाहिए।

हुमायूं कबीर के 6 दिसंबर को मस्जिद बनाने और उसका नाम बाबरी मस्जिद रखने के ऐलान पर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि बाबरी मस्जिद अयोध्या की एक ऐतिहासिक मस्जिद थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वहां राम मंदिर निर्माण का मामला आगे बढ़ा और अब इस मुद्दे पर दोबारा विवाद खड़ा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। भारत में मौजूदा माहौल अमन और शांति का है। लोग सामान्य तरीके से अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। ऐसे समय में किसी नई मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद रखना नए विवाद और टकराव को जन्म दे सकता है। उन्होंने हुमायूं कबीर से आग्रह किया कि वे मस्जिद का निर्माण जरूर कराएं, लेकिन उसका नाम बाबरी मस्जिद न रखें। इसके बजाय कोई दूसरा प्यारा और बेहतर नाम चुनें।

मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा कि धार्मिक स्थलों के नाम को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे समाज में तनाव बढ़े।

--आईएएनएस

पीएसके