“बाएं से नहीं, दाएं से चलो”: स्कूलों में ट्रैफिक सेंस पढ़ाने वाली पत्रिका बनी टेक्स्टबुक, राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंची
सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के प्रति बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक पहल ने अब पूरे प्रदेशों में जगह बना ली है। राजस्थान में तैयार की गई एक पत्रिका, जिसे खासतौर पर स्कूलों में ट्रैफिक सेंस सिखाने के लिए बनाया गया था, अब टेक्स्टबुक के रूप में तैयार होकर राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश के स्कूलों तक पहुंच चुकी है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सड़क पर सुरक्षित रहने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की आदत डालना है। खासकर यह संदेश देने पर जोर दिया गया है: “बाएं से नहीं, दाएं से चलो”, ताकि बच्चे सड़क पर चलते समय सुरक्षा नियमों को गंभीरता से समझें और पालन करें।
शिक्षकों का कहना है कि इस पत्रिका के माध्यम से बच्चों ने न सिर्फ सड़क सुरक्षा के नियम सीखे हैं, बल्कि सड़क पर आने वाले खतरों और दुर्घटनाओं से बचने के तरीके भी जानें। इसके अलावा, इसे पढ़ाने से बच्चों में ट्रैफिक के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना भी विकसित हुई है।
राजस्थान के कई स्कूलों में इस पत्रिका को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया और परिणाम स्पष्ट नजर आने लगे। इसी सफलता के कारण इसे मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के स्कूलों में भी अपनाया गया।
इस पहल के पीछे की टीम का कहना है कि बच्चों को छोटे उम्र से ही सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की जानकारी देना बेहद जरूरी है। इससे न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि आने वाले समय में सड़क हादसों की संख्या में भी कमी आ सकती है।
इस टेक्स्टबुक ने साबित कर दिया है कि सरल भाषा और रोचक सामग्री के माध्यम से बच्चों को ट्रैफिक नियमों की शिक्षा देना कितना असरदार हो सकता है। इसके चलते राजस्थान और मध्य प्रदेश के स्कूलों में यह संदेश लगातार गूंज रहा है: “बाएं से नहीं, दाएं से चलो”।