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जंतर-मंतर प्रदर्शन में छात्रों को खाना खिलाने वाले वालंटियर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, फुटेज में जाने पुलिस पर अवैध हिरासत और धमकाने का आरोप

 

जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने वाले वालंटियर जुनैद मलिक ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के रास्ते से उठाया, कई घंटों तक हिरासत में रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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6 घंटे तक हिरासत में रखने का आरोप

जुनैद मलिक का दावा है कि पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया और लगभग छह घंटे तक अपने कब्जे में रखा। इस दौरान उन्हें न तो हिरासत का कोई स्पष्ट कारण बताया गया और न ही किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें लगातार धमकाया गया और मानसिक दबाव बनाया गया।

सुनसान इलाके में छोड़ने का दावा

याचिका के अनुसार, कई घंटे तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस उन्हें देहरादून रोड पर एक सुनसान स्थान पर छोड़कर चली गई। जुनैद का कहना है कि इस कार्रवाई से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

परिवार को भी परेशान करने का आरोप

जुनैद मलिक ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके परिवार के सदस्यों को भी बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के परेशान किया। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उनके परिजनों से पूछताछ की और दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि इसके लिए कोई कानूनी नोटिस या औपचारिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

सुप्रीम कोर्ट से न्याय की मांग

अपनी याचिका में जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अवैध हिरासत व पुलिस कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

पुलिस का पक्ष आना बाकी

फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस अपना पक्ष रख सकती है। अदालत के निर्देशों और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।यह मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। अदालत में प्रस्तुत तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।