×

विश्व दुग्ध दिवस 2026: महिलाओं की भूमिका को समर्पित, दूध की पौष्टिकता का जश्न

 

नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। दूध पीना शरीर के लिए लाभकारी होता है; यही वजह है कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक को डॉक्टर्स दूध के सेवन की सलाह देते हैं। दूध में काफी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, जो पूरे शरीर के विकास के लिए फायदेमंद होता है।

विश्व दुग्ध दिवस 2026 की थीम महिलाओं और किसानों को सम्मान देने को लेकर है। ऐसे में दूध के महत्व को समझने और इसे व्यर्थ न जाने देने के लिए और दूध के फायदे के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन विभाग (एफएओ) की ओर से वर्ष 2001 में विश्व दुग्ध दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी। इसमें कई देश भाग ले रहे हैं। दूध के महत्व को समझने के लिए इन देशों में कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

दुनियाभर में दूध और डेयरी उत्पाद अरबों लोगों के आहार का अभिन्न अंग हैं। दूध कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी, बी12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का प्राकृतिक स्रोत है, जो हड्डियों की मजबूती, बच्चों के विकास, इम्यूनिटी बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन विभाग के अनुसार डेयरी क्षेत्र एक अरब से अधिक लोगों की आजीविका का साधन है, खासकर विकासशील देशों में जहां यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

इस वर्ष का थीम विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि महिलाएं वैश्विक डेयरी उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाती हैं। कई देशों में दूध निकालने, पशु देखभाल, दूध प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का काम मुख्यतः महिलाएं ही संभालती हैं।

भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। यहां लाखों महिला डेयरी किसान ‘ऑपरेशन फ्लड’ जैसी पहलों के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर चुकी हैं। अमूल और अन्य सहकारी संगठनों ने महिलाओं को संगठित कर उन्हें सशक्त बनाया है। विश्व दुग्ध दिवस 2026 महिलाओं की इस अथक मेहनत को मान्यता देने का अवसर है।

विभिन्न राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों की ओर से स्कूलों और कॉलेजों में जागरुकता कार्यक्रम, दूध वितरण अभियान, फार्म विजिट और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और राज्य सरकारें इस अवसर पर किसानों को प्रशिक्षण और बेहतर प्रथाओं के बारे में जानकारी दे रही हैं। सस्टेनेबल डेयरी फार्मिंग, पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण पर जोर दिया जा रहा है।

दूध सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और समुदायों को जोड़ने का माध्यम है। महिला किसानों को सशक्त बनाकर हम न सिर्फ डेयरी क्षेत्र को मजबूत करेंगे बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को भी प्राप्त करेंगे।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम