विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2026: बच्चों को खूबसूरत बचपन, बड़ों को मिले सम्मानजनक रोजगार
नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। बचपन खेलने, सीखने और मुस्कुराने का समय होता है, लेकिन आज भी ऐसे करोड़ों बच्चे हैं, जिन्होंने अपने नन्हे कंधों पर मजदूरी का बोझ उठाए हैं। यह बोझ न सिर्फ उनका बचपन खराब कर रहा है, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकार में ढकेल रहा है। बचपन को इस दलदल से निकालने और बेहतर भविष्य देने के लिए हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद है लोगों को यह समझाना कि बच्चों से काम करवाना सिर्फ गलत नहीं, बल्कि उनके भविष्य के साथ एक बड़ा अन्याय है।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने साल 2002 में इस दिवस की शुरुआत की थी, ताकि दुनिया इस समस्या को गंभीरता से ले। साल 2026 की थीम है "बाल मजदूरी को रेड कार्ड: बच्चों के लिए निष्पक्ष खेल, वयस्कों के लिए सम्मानजनक काम।"
हाल ही में मोरक्को के माराकेश में हुई एक वैश्विक बैठक में यह साफ कहा गया कि अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस कदम चाहिए। एक ऐसा रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और कानून को सबको जोड़कर बाल श्रम को खत्म करने की योजना है।
लेकिन, सच्चाई यह भी है कि प्रगति होने के बावजूद समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया में आज भी करीब 13.8 करोड़ बच्चे किसी न किसी तरह के बाल श्रम में फंसे हैं। इनमें से करोड़ों बच्चे खतरनाक और जोखिम भरे कामों में लगे हैं।
हालांकि, अगर हम पिछले 20–25 साल देखें तो सुधार जरूर हुआ है। साल 2000 में बाल श्रम में बच्चों की संख्या करीब 246 मिलियन थी, जो अब घटकर 138 मिलियन के आसपास आ गई है, लेकिन यह गति इतनी धीमी है कि तय लक्ष्य अभी भी दूर लगता है।
दुनिया में सबसे ज्यादा असर उप-सहारा अफ्रीका में देखा जाता है, जहां करोड़ों बच्चे आज भी काम करने को मजबूर हैं। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन पूरी तरह समाधान अभी भी बाकी है। लैटिन अमेरिका में भी कुछ कमी आई है, पर समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
दुनिया भर में करीब 61 प्रतिशत बच्चे कृषि क्षेत्र में काम करते हैं। इसके बाद सेवाएं आती हैं, जैसे घरेलू काम या बाजार में सामान बेचना। फिर उद्योगों में, जैसे खदानों और फैक्ट्रियों में भी बच्चे काम कर रहे हैं। इस बाल श्रम के पीछे सबसे बड़ी वजह गरीबी है। जब घर में खाने-पीने की दिक्कत होती है तो माता-पिता मजबूरी में बच्चों को काम पर भेज देते हैं, लेकिन यह समाधान नहीं, एक और बड़ी समस्या की शुरुआत है, क्योंकि इससे बच्चे पढ़ाई से दूर हो जाते हैं और उनका पूरा भविष्य प्रभावित होता है।
यूनिसेफ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने कुछ बहुत जरूरी सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि बच्चों को काम पर न भेजना पड़े। दूसरा, हर बच्चे को अच्छी और मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए। तीसरा, बड़ों के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार होना चाहिए, ताकि घर चलाने के लिए बच्चों पर निर्भरता न रहे। चौथा, कानूनों को सख्ती से लागू करना जरूरी है, ताकि कोई भी संस्था या व्यक्ति बच्चों का शोषण न कर सके।
--आईएएनएस
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