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विश्व यज्ञ दिवस: दिल्ली के आर्यसमाज मंदिर में वैदिक यज्ञ, विनोद बंसल बोले- यज्ञ सभी संकटों का समाधान

 

नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। विश्व यज्ञ दिवस के अवसर पर दिल्ली के संत नगर स्थित आर्यसमाज मंदिर में रविवार को एक विशेष वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनेक धर्मावलंबियों ने भाग लेकर विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। इस यज्ञ में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी भाग लिया।

वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस के अवसर पर पूरे विश्व को शुभकामनाएं। यज्ञ को सबसे श्रेष्ठ कर्म माना जाता है, वेदों में भी इसकी पुष्टि की गई है। यह न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक है, बल्कि आध्यात्मिक, वैदिक और सांस्कृतिक सुख भी मिलता है।

उन्होंने कहा, "यह यज्ञ राष्ट्र की उन्नति और विकास के लिए है। यह दूसरे के प्रति समर्पण की भावना का यज्ञ है। हम यज्ञ के दौरान अग्नि में आहूति देकर सब कुछ समर्पण कर देते हैं। इसमें अहंकार और द्वेष सब शामिल हैं।"

विनोद बंसल ने कहा, "आज विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रहा है या युद्ध की मानसिकता में डूबा हुआ है, उसके कारण आर्थिक संकट भी पैदा हुए हैं। यज्ञ सभी संकटों का समाधान है। इसके माध्यम से हम एक दूसरे से जुड़ते हैं। ये उससे जुड़ने का काम है।"

वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति हर रोज यज्ञ करता है तो उसका मानसिक प्रदूषण भी दूर होगा। हर व्यक्ति को अपने समाज, परिवार और राष्ट्र के कल्याण के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

वहीं, कार्यक्रम के दौरान विनोद बंसल ने कहा कि विश्व यज्ञ दिवस केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं, बल्कि मानवता, राष्ट्र और प्रकृति के कल्याण के लिए सामूहिक समर्पण का दिवस है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ का वास्तविक उद्देश्य व परिणाम अपने स्वार्थ, अहंकार और विकारों का त्याग कर लोकमंगल के लिए समर्पित होना है।

उन्होंने कहा कि आज जब विश्व हिंसा, आतंकवाद, प्रदूषण और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब वैदिक यज्ञ की भावना मानव समाज को नई दिशा देने में सक्षम है। यज्ञ अंतःकरण व बाह्य वातावरण की शुद्धि, मानसिक सकारात्मकता और सामाजिक समरसता का माध्यम भी है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपने व्यक्तिगत स्वार्थों का त्याग कर विश्व कल्याण, मानवता की सेवा और वैदिक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन हेतु कार्य करेंगे व यज्ञ की ज्योति को घर-घर तक पहुंचाने का अभियान चलाएंगे।

--आईएएनएस

डीसीएच/