विश्व महासागर दिवस विशेष: अथाह गहराइयों का मौन संकट, जहां नीली धरती की सांसें हो रहीं भारी
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। सागर प्रकृति का वह अद्भुत शिक्षक है, जो गंभीरता, सामर्थ्य, मर्यादा और स्थिरता का पाठ पढ़ाता है। अपार शक्ति होते हुए भी वह अपनी सीमाएं नहीं लांघता। उसकी गहराई जितनी अधिक होती है, उसका स्वभाव उतना ही शांत दिखाई देता है, लेकिन आज इसी महासागर को समर्थन की जरूरत है।
विडंबना यह है कि इंसान पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर चंद्रमा पर पानी की तलाश कर रहा है, जबकि पृथ्वी पर मौजूद विशाल जलसंपदा को अपनी महत्वाकांक्षाओं और अनियंत्रित दोहन की भेंट चढ़ा रहा है। इसका असर केवल महासागरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री जैव विविधता भी तेजी से प्रभावित हो रही है। अनेक समुद्री जीव और पारिस्थितिक तंत्र मानवजनित प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और जलवायु परिवर्तन के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बड़ी मछलियों की 90 प्रतिशत आबादी खत्म हो चुकी है और 50 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां नष्ट हो चुकी हैं। हम समुद्र से इतना कुछ ले रहे हैं जितना उसकी भरपाई नहीं हो पा रही है।
महासागर पृथ्वी के 70 प्रतिशत से अधिक भाग को कवर करता है। यह हमारे जीवन का स्रोत है, जो मानवता और पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव के जीवनयापन का आधार है। महासागर पृथ्वी की कम से कम 50 प्रतिशत ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, यह पृथ्वी की अधिकांश जैव विविधता का घर है और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।
इसके अलावा, महासागर हमारी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और अनुमान है कि 2030 तक महासागर आधारित उद्योगों में 4 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा। इतने व्यापक योगदान के बावजूद आज महासागर स्वयं संरक्षण और समर्थन की अपेक्षा कर रहा है।
वर्तमान में प्लास्टिक कचरा पृथ्वी के लगभग हर हिस्से में अपनी जगह बना चुका है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो 2040 तक हर साल सागर में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक की मात्रा 3.7 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच सकती है।
हालांकि, अब समय है कि महासागर के साथ हमारा संबंध केवल दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण और पुनर्जीवन का बने। इसके लिए वैश्विक स्तर पर संतुलित और टिकाऊ प्रयासों की जरूरत है, इसीलिए समुद्री संसाधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 8 जून 2009 में पहला विश्व सागर दिवस मनाया गया।
इतिहास पर नजर डालें तो विश्व महासागर दिवस की अवधारणा पहली बार 8 जून 1992 को रियो डी जनेरियो में आयोजित ग्लोबल फोरम के दौरान सामने आई थी। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (यूएनसीईडी) के समानांतर आयोजित किया गया था, जहां गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज को पर्यावरणीय मुद्दों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।
इसके बाद साल 2008 में कनाडा के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर 8 जून को आधिकारिक रूप से 'विश्व महासागर दिवस' के रूप में मान्यता दे दी। परिणामस्वरूप साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहला आधिकारिक 'विश्व महासागर दिवस' मनाया गया। साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से विश्व महासागर दिवस के पहले आयोजन का विषय 'हमारे महासागर, हमारी जिम्मेदारी' था।
परंपरागत रूप से यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित किया जाता है, लेकिन कोविड-19 के कारण संयुक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस 2020 पहली बार डिजिटल रूप में आयोजित किया गया, जो वैश्विक जनता के लिए सुलभ था। संयुक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस 2022 वार्षिक आयोजन का पहला हाइब्रिड उत्सव था, जिसमें न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रत्यक्ष कार्यक्रम और वैश्विक जनता की पहुंच के लिए आभासी घटक दोनों शामिल थे।
--आईएएनएस
डीसीएच/डीकेपी