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Viral Video: कॉमेडी शो में ‘370 रुपये की बिरयानी’ का किस्सा बना आफत, शख्स को गंवानी पड़ी नौकरी

 

कभी-कभी मज़ाक में कही गई छोटी सी बात के इतने गंभीर नतीजे हो सकते हैं कि वे किसी व्यक्ति की ज़िंदगी की दिशा ही बदल दें। ठीक ऐसा ही एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान हुआ, जहाँ एक व्यक्ति की मज़ाकिया टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और उसे तुरंत अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। गुरुग्राम के रहने वाले हिमांशु जांगड़ा को शायद अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा कि ₹370 की बिरयानी का ज़िक्र करना उन्हें इतनी बड़ी मुसीबत में डाल देगा।

**एक मज़ाक बना मुसीबत**

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो का एक क्लिप वायरल हुआ, जिसमें दर्शकों के साथ बातचीत दिखाई गई। बातचीत के दौरान, हिमांशु जांगड़ा ने एक 'डेट' का किस्सा सुनाया। उन्होंने एक महिला के साथ बाहर जाने और लगभग ₹360-370 की बिरयानी खाने का ज़िक्र किया। हिमांशु ने कहा कि जब महिला ने उन्हें छोड़ने के लिए कहा, तो उन्होंने मज़ाक में टिप्पणी की, "मैंने ₹370 खर्च किए हैं, तो मैं अपने पैसे वसूल करके ही रहूंगा।" इस बयान का मतलब "यौन लाभ की उम्मीद" (sexual favoritism) के तौर पर निकाला गया और मामला बिगड़ गया। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।

Pranit More.. the worst standup comedian AWA human being 🤡 pic.twitter.com/Y1DQcjW4tc

— Vishakha 🌟 (@MasalaaMinds) June 5, 2026


**कंपनी ने की सख़्त कार्रवाई**

जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, स्टारविक डिज़ाइन (Starwick Design) - वह कंपनी जहाँ हिमांशु काम करते थे - ने सख़्त कार्रवाई की। कंपनी के संस्थापक विवेक विश्वकर्मा ने साफ़ तौर पर कहा कि "गलतियों के नतीजे भुगतने पड़ते हैं" और हिमांशु को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने कहा कि यह फ़ैसला सोच-समझकर लिया गया था।

**माफ़ी और सोशल मीडिया से दूरी**

आलोचनाओं के बाद, हिमांशु ने अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगी और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डीएक्टिवेट कर दिए। इस बीच, कॉमेडियन प्रणीत मोरे ने भी घटना पर माफ़ी मांगते हुए प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।

**सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया**

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया बंटा हुआ नज़र आया। कुछ लोगों का तर्क था कि हास्य की भी सीमाएं होती हैं और ऐसी टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं। वहीं, कुछ यूज़र्स को लगा कि मज़ाक को ज़रूरत से ज़्यादा तूल दिया गया। हालाँकि, ज़्यादातर लोगों ने इसे एक सबक के तौर पर देखा कि कैसे किसी व्यक्ति के शब्दों का सार्वजनिक मंच पर गहरा असर पड़ सकता है।