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'विकसित भारत 2047' का सेतु बनेगा एआई, एआई तकनीक नहीं बल्कि मानवीय क्रांति: सीपी राधाकृष्णन

 

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। नई दिल्ली में बुधवार को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) का 72वां संस्थापक दिवस समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल हुए। उन्होंने “सुशासन के लिए एआई” विषय पर 5वां डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक स्मारक व्याख्यान भी दिया और आधुनिक शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर लोगों को जानकारी दी।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकष्णन ने अपने संबोधन की शुरुआत में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने डॉ. प्रसाद की सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि सच्चा शासन सत्ता नहीं बल्कि सेवा का माध्यम होता है।

उन्होंने सोमनाथ मंदिर की उनकी ऐतिहासिक यात्रा का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने अपने सिद्धांतों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शासन प्रणाली को नई दिशा दे रहा है। एआई सरकारों को नागरिकों को बेहतर ढंग से समझने, त्वरित प्रतिक्रिया देने और अधिक प्रभावी सेवा प्रदान करने की क्षमता दे रहा है। उनके अनुसार, एआई का उपयोग शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए, उन्होंने एआई को इस दिशा में एक प्रमुख सहायक बताया। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना संभव हो रहा है और इससे संसाधनों के दुरुपयोग में कमी आ रही है।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक नीति और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है, जिससे डेटा-आधारित निर्णय लेने और सेवा वितरण में सुधार हो रहा है।

उन्होंने युवाओं और पेशेवरों से अपील की कि वे नई तकनीकों को अपनाएं और ‘एआई-रेडी वर्कफोर्स’ के निर्माण में योगदान दें। साथ ही उन्होंने एआई के नैतिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी विकास को निष्पक्षता, जवाबदेही और मानवता के मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि एक मानवीय क्रांति है, जो समाज को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बना सकती है। समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम