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विदेशी चंदे और उसकी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एफसीआरए कानून: प्रियंक कानूनगो

 

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध करने वालों पर निशाना साधा है।

प्रियंक कानूनगो ने आईएएनएस से कहा कि भारत में आने वाले विदेशी चंदे और उसकी प्रक्रिया, उसके होने वाले खर्च को पारदर्शी बनाने के लिए एफसीआरए कानून है। सरकार इस कानून में जो संशोधन लेकर आ रही है, वो संशोधन ये तय करेगा कि विदेशी चंदे से भारत में अवैध धर्मांतरण न किया जाए, भारत के डेमोग्राफी को अवैध तरीके से न बदला जाए।

उन्होंने कहा कि भारत के जनसांख्यिकी अनुपात को बदलने से देश के भूगोल को बदलने का संकट पैदा होता है। देश की जनता के हित में ये कानून आवश्यक है। प्रियंक कानूनगो ने कहा कि जो भी लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे लोग भारत की डेमोग्राफी को बदल देना चाहते हैं, वे लोग भारत की संप्रभुता को विदेशी चंदे के माध्यम से नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।

प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि सरकार के इस प्रयास का सभी को प्रशंसा करनी चाहिए। मानव अधिकारों के संरक्षण के दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। पैसे की ताकत से धर्मांतरण करना, धर्मांतरण करवाना मानवों के मूल अधिकार का उल्लंघन है। हम सरकार के इस कदम का समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा कि एफसीआरए कानून में पारदर्शिता आने के बाद हमें ये पता चला कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी का जो राजीव गांधी फाउंडेशन एनजीओ था, वो चाइना का पैसा भारत में लाकर किस प्रकार विघटनकारी काम करवा रहा था। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ के देश में अगर आप समाज सेवा का काम कर रहे हो तो आपकी विश्वसनीयता होनी चाहिए।

प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भारत में दानदाताओं की कमी नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आपको विश्वास दिलाना होगा कि आप सही में देश के प्रति काम कर रहे हो। अगर देश के प्रति काम करोगे तो विदेशी चंदे पर डिपेंडेंसी नहीं रहेगी, और अगर विदेशी चंदा चाहिए, तो स्पष्ट रूप से बताओ कि क्या काम करोगे?

--आईएएनएस

एसडी/डीएससी