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विदेश में छिपकर झारखंड में साम्राज्य चलाने वाले गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस

 

रांची, 2 नवंबर (आईएएनएस)। विदेश में सुरक्षित ठिकानों पर बैठकर झारखंड में आपराधिक साम्राज्य चलाने वाले गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कसने की तैयारी है। झारखंड पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर दोनों के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। दोनों गैंगस्टर लंबे समय से झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। कोयलांचल धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, लातेहार से लेकर राजधानी रांची तक इन दोनों गैंगस्टरों के गुर्गों ने पिछले दो साल में 100 से भी अधिक आपराधिक वारदात अंजाम दिए हैं।

दोनों गिरोहों के 60 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद भी धमकी, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं नहीं थम रहीं। जांच एजेंसियों के अनुसार विदेशों में बैठकर दोनों गिरोहों के सरगना डिजिटल माध्यमों से स्थानीय अपराधियों, शूटरों और हथियार सप्लायरों के संपर्क में रहते हैं। झारखंड के कारोबारी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियां इनके निशाने पर रहती हैं। पहले फोन या अन्य माध्यमों से रंगदारी मांगी जाती है। रकम नहीं मिलने पर कारोबारी प्रतिष्ठानों और निर्माण स्थलों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की जाती है। इस तरह स्थानीय गुर्गों के जरिए वारदात को अंजाम देकर गिरोह के सरगना खुद पुलिस की सीधी पहुंच से दूर रहते हैं।

राहुल सिंह का नाम पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहा है। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने कथित तौर पर गिरोह की कमान संभाल ली। पुलिस के अनुसार, उसका नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार सहित राज्य के कई जिलों में सक्रिय है। इन इलाकों में कोयला कारोबार, औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण परियोजनाओं से जुड़े लोगों को धमकी देकर रंगदारी वसूलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। पुलिस इस नेटवर्क के स्थानीय सदस्यों और उनके आर्थिक मददगारों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है।

दूसरी ओर, राहुल दुबे गिरोह की गतिविधियां भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। हाल में 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें वारदात की जिम्मेदारी लेने के साथ होटल संचालक को धमकी दी गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने गिरोह के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। 30 अक्टूबर को रांची पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद राहुल दुबे गिरोह के पांच कथित शूटरों और मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया।

पुलिस की रणनीति पहले गिरोह के स्थानीय नेटवर्क को तोड़ने और फिर विदेश में बैठे सरगनाओं तक पहुंचने की है। शूटरों, हथियार सप्लायरों और अन्य मददगारों की गिरफ्तारी के जरिए गिरोह की आपराधिक गतिविधियों और उसके संचालन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब दोनों गैंगस्टरों की तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा सकेगी। इसके तहत इंटरपोल सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए सूचना उपलब्ध कराई जाती है।

हालांकि, रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता। संबंधित देश के कानून के तहत वहां की एजेंसियां आगे की कार्रवाई करती हैं। गिरफ्तारी की स्थिति में भारत सरकार प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोनों को देश वापस लाने का प्रयास कर सकती है।

झारखंड पुलिस के लिए यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों के सरगना अक्सर स्थानीय नेटवर्क के जरिए वारदात कराते हैं और खुद देश से बाहर रहकर पुलिस की कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं। अब स्थानीय गुर्गों पर कार्रवाई के साथ-साथ विदेश में बैठे कथित सरगनाओं तक पहुंचने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली जा सकेगी।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम