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विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश सचिव मिस्री की एमपी-एलईएडीएस फेलो से मुलाकात, विदेश नीति पर हुई चर्चा

 

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने गुरुवार को एमपी-एलईएडीएस (मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम - लीडरशिप एंड एंगेजमेंट फॉर एडवांस्ड डेवलपमेंट स्टडीज) फेलोशिप प्रोग्राम के युवा प्रतिभागियों से मुलाकात की और भारत की विदेश नीति और मुख्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, "मेरे संसदीय साथी राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े द्वारा आयोजित किए गए एमपी-एलईएडी फेलोशिप प्रोग्राम के तहत भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए टैलेंटेड युवा पार्टिसिपेंट्स से मिलकर खुशी हुई।"

उन्होंने आगे लिखा, "भारतीय विदेश नीति के लिए उनकी दिलचस्पी और उत्साह तारीफ के काबिल है। हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, डायस्पोरा वेलफेयर, नेबरहुड फर्स्ट, टेक्नोलॉजी, विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के बारे में बातचीत की गई।"

इसके अलावा, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एमपी-एलईएडीएस फेलो के एक समूह से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव भी मौजूद रहे।

विदेश मंत्रालय ने मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एमपी-एलईएडीएस फेलो के एक समूह से मुलाकात की और उनके साथ भारत की विदेश नीति पर दिलचस्प चर्चा की। बातचीत के लिए राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े मौजूद थे।"

ये मुलाकातें एमपी एलईएडीएस फेलोशिप के तहत हुईं। यह दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम है, जिसे राज्यसभा सांसद अजीत माधवराव गोपचड़े ने शुरू किया है।

इसका उद्देश्य युवाओं को शासन, लोक नीति और विधायी प्रक्रियाओं का अनुभव देना है। उपराष्ट्रपति सचिवालय द्वारा 2 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस फेलोशिप के लिए 5,000 से अधिक आवेदनों में से 40 प्रतिभागियों का चयन किया गया। चयनित प्रतिभागियों में 62 फीसदी महिलाएं थीं और प्रतिभागी देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

2 जुलाई को उपराष्ट्रपति भवन में फेलो से बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रतिबद्ध लीडर्स बनने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "नेतृत्व का आकलन अधिकार से नहीं, बल्कि समाज की सेवा विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने की क्षमता से होता है।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम