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अजमेर की आनासागर झील में विदेशी पक्षियों की तस्करी का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल

 

राजस्थान के अजमेर शहर की ऐतिहासिक आनासागर झील एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह झील की खूबसूरती नहीं, बल्कि विदेशी प्रवासी पक्षियों की तस्करी बनी हुई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि शिकारी पहले से झील के एक हिस्से में जाल बिछाकर बैठे हैं। जैसे ही झील में प्रवासी पक्षी जाल में फंसता है, एक शिकारी झील में उतरता है और पक्षी को बेरहमी से पकड़ लेता है। इसके बाद वह पक्षी झील के बाहर खड़े अपने साथी को सौंप देता है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पक्षी को प्लास्टिक के थैले में रखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि इसका उद्देश्य बाजार में तस्करी करना है।

जानकारी के अनुसार, आनासागर झील में हर साल सर्दियों में विदेशी और स्थानीय प्रवासी पक्षी आते हैं। यह झील पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास और संरक्षण क्षेत्र के रूप में महत्वपूर्ण मानी जाती है। बावजूद इसके, वीडियो में दिखाई देने वाला शिकार और तस्करी का यह तरीका वन्य जीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है।

स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों ने इस मामले में चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि झील में तस्करी और शिकार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और प्रशासन की ओर से तत्काल कार्रवाई और निगरानी नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट और जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

वन विभाग ने फिलहाल इस वीडियो की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की तत्काल जांच की जा रही है। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि झील के आसपास सख्त निगरानी और गश्त बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय निगरानी के बिना इन घटनाओं को रोकना मुश्किल है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर सख्त प्रतिक्रिया और विरोध देखने को मिल रहा है। वन्यजीव प्रेमी और एनजीओ सक्रिय सदस्य प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि शिकारी और तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और आनासागर झील को सुरक्षित प्रवासी पक्षी आवास घोषित किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी और स्थानीय प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदाय, पर्यटक और नागरिकों की सक्रिय भूमिका भी जरूरी है। उन्होंने अपील की है कि लोग किसी भी शिकार या तस्करी की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।

अजमेर की आनासागर झील में यह मामला यह संकेत देता है कि प्राकृतिक आवास और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां हैं। प्रशासन और वन विभाग के लिए यह चेतावनी है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और जैव विविधता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

इस प्रकार, आनासागर झील का यह मामला न केवल प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।